भीमा कोरेगांव का विजय स्तंभ : दलितों की नई राजनीतिक क्षमताओं और आकांक्षाओं का है दर्शन

भीमा कोरेगांव का विजय स्तंभ : दलितों की नई राजनीतिक क्षमताओं और आकांक्षाओं का है दर्शन
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कोरेगांव महाराष्ट्र पुणे जनपद की शिरूर तहसील में भीमा नदी के किनारे बसा हुआ एक छोटा सा गांव है। इस गांव को नदी के किनारे बसा होने के कारण ही इसको भीमाकोरे गांव कहते हैं। बारह अधिकारियों और 834 पैदल सैनिक जिनमें से 500 महार थे, ने पेशवा बाजीराव द्वितीय की सेना के खिलाफ लड़ाई जीती थी।

इस जीत को याद करने के लिए कोरेगांव में भीमा नदी के किनारे काले पत्थरों का क्रान्ति स्तम्भ का निर्माण किया था और हर साल उनकी जीत का जश्न मनाया जाता है। वर्ष 1927 में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने इस स्तम्भ का दौरा किया और तब से यह हर साल दलितों के लिए तीर्थ यात्रा का स्थान बन गया। अपने मृत सैनिकों की स्मृति में कंपनी ने कोरेगांव में ‘विजय स्तंभ’ (एक ओबिलिस्क) का निर्माण किया।

दलितों के लिए यह स्तम्भ उनकी नई राजनीतिक क्षमताओं और आकांक्षाओं का एक दर्शन है। स्तंभ का शिलालेख घोषित करता है कि कैप्टन स्टांटन की सेना ने पूर्व में ब्रिटिश सेना की गर्वित विजय हासिल की। कोरेगांव स्तंभ शिलालेख में लड़ाई में मारे गए 49 कंपनी सैनिकों के नाम शामिल हैं। इनमें से 22 महार जाति के लोग हैं।

2005 में भीमा-कोरेगांव रणशंघ सेवा संघ के गठन ने यादगार जगह के रूप में स्थापित किया जहां महार ईस्ट इंडिया कंपनी के स्वामी के लिए नहीं बल्कि पेशवाओं के खिलाफ लड़े। हर साल 1 जनवरी को यहां आने वाले लाखों आगंतुकों के साथ ही महार रेजिमेंट के सेवानिवृत्त अफसरों का एक दल भी श्रद्धांजलि देता है लेकिन भारतीय सेना अब कोरेगांव की लड़ाई का जश्न नहीं मनाती है क्योंकि यह भारतीयों के खिलाफ अंग्रेजों की लड़ाई के रूप में देखा जाता है।

आजादी के 50 साल बाद डोगरा रेजिमेंट के एक कप्तान चव्हाण (कोरेगांव में भी डोगरा की एक बटालियन भी लड़ाई लड़ी) ने कोरेगांव दिवस में एक टोस्ट पीने से इनकार कर दिया था क्योंकि उस लड़ाई उनके पूर्वज पेशवा सेना का हिस्सा थे। सेना ने ऐसी सभी जीत की समीक्षा करने का निर्णय लिया। 1980 के उत्तरार्ध में वरिष्ठ अधिकारियों और सलाहकारों की एक समिति की स्थापना की गई, जिसमें सभी युद्ध सम्मानों की समीक्षा की गई जिन्हें भारतीय सेना के विभिन्न रेजिमेंटों द्वारा मनाया गया और ब्रिटिश द्वारा विरासत के रूप में छोड़ दिया गया।

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