Thursday , December 14 2017

पाकिस्तान को नसीहत देने वाले अमेरिका पर चुप्पी कब तोड़ेंगे?

जब पाकिस्तान के सैनिक स्कूल में आतंकियो ने हमला कर 100 बच्चों को मार दिया तो भारतीय लोगों ने भी बच्चों के प्रति अपनी संवेदना ज़ाहिर की, और करना भी चाहिए आख़िर हम इंसान जो हैं,

लेकिन लगे हाथ हर दूसरा व्यक्ति पाकिस्तान को लानत भेजता हुआ ये नसीहत करता दिखाई पड़ा कि ” पाकिस्तान ने जो बोया वो काटा ” , चलिए इस नसीहत से हम भी सहमत हैं लेकिन —– जब आज अमेरिका में म्यूज़िक कन्सर्ट में फायरिंग में 50 लोग मारे गए तो संवेदना सब ज़ाहिर कर रहे हैं लेकिन लानत मनालत कोई नहीं भेज रहा, क्यों?

ऐसा दोहरा रवैय्या क्यों भाई? पाकिस्तान ने अपने पड़ोसी भर से युद्ध किया, कश्मीर में दखलंदाज़ी, इसके अलावा किसी निर्वाचित सरकार और संप्रभु देश पर झूठा इल्ज़ाम लगा कर लाखो ( शायद अब संख्या करोड़ पहुँच गई होगी) निर्दोष नागरिको, महिलाओं, बच्चों का कत्ल तो नहीं किया, ये “उपलब्धि ” अभी सिर्फ अमेरिका के ही खाते में है, इराक हो या वियतनाम, अफगानिस्तान हो या लीबीया, सीरीया, यमन और मिस्र, हर मुल्क में अमेरिका के अनावश्यक दख़ल से हालात बजाए सुधरने के और बद से बदतर हुए, हंसते खेलते मुल्क तबाह हो गए, लाखो बेगुनाह मारे गए, इसका ज़िम्मेदारी कौन लेगा?

लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में यहाँ सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है। फिलहाल इस घटना के पीछे कौन है जांच की जा रही है लेकिन उन लाखो बेगुनाह लोगों के घर का कोई बंदा कल को हमला कर अमेरिका में लाशे गिरा दे तो ताज्जुब नहीं होना चाहिए क्यों कि — हम पाकिस्तान को तो नसीहत करते हैं लेकिन अमेरिका को नहीं करना चाहते, अच्छा सुनिए ज़ी न्यूज़ देखकर मेरी वाल पर मत आइएगा, उसने फर्ज़ी स्टोरी बना कर चला भी दी है .

(यह लेख सरफ़राज़ नज़ीर की फेसबुक वॉल से लिया गया है)

 

 

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