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भोपाल एनकाउंटर की रिपोर्ट पर सिमी सदस्यों के वकील बोले- यह जांच नहीं, सच छुपाने की कोशिश है

न्यायिक आयोग ने पिछले साल 30-31 अक्टूबर की दरम्यानी रात भोपाल सेंट्रल जेल से फरार सिमी के कथित आठ आतंकियों के एनकाउंटर की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। अब सामान्य प्रशासन विभाग इस रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखेगा।

आयोग की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस एसके पांडे की जांच में एनकाउंटर को सही ठहराते हुए इसमें शामिल पुलिस अधिकारियों को जेल की सुरक्षा व्यवस्था में ख़ामी के बावजूद क्लीन चिट दी गई है।

हफिंग्टन पोस्ट इंडिया से बातचीत के दौरान मारे गए सिमी कार्यकर्ताओं के वकील परवेज़ आलम ने कहा कि यह जांच नहीं है। इस मामले में कोई पूछताछ नहीं हुई। हमें कोई दस्तावेज नहीं मिला, मुठभेड़ के बाद गुंगा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर की एक कॉपी भी नहीं मिली, जबकि यह एक सार्वजनिक दस्तावेज़ है। हमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपियां भी नहीं दी गईं,”।

आलम के मुताबिक, आयोग ने उन्हें तथ्यों को पेश करने और अपने पक्ष को रखने का मौका नहीं दिया। उन्होंने दावा किया कि अगर उन्हें मौका दिया जाता तो वह पुलिस द्वारा पेश की गई कहानी का पर्दाफाश कर देते।

परवेज़ ने कहा कि इस मामले में आए अधिकारियों के बयान में बड़ा विरोधाभास हैं। एटीएस प्रमुख ने कहा कि एनकाउंटर में मारे गए युवाओं के पास हथियार नहीं थे, जबकि आईजी ने दावा किया कि उनके पास हथियार थे।

इस मामले में कई और सवाल भी उठते हैं। परवेज़ ने पूछा कि इतनी हाई सिक्योरिटी जेल में सिर्फ घटना वाली जगह के कैमरे ही क्यों खराब थे। उन्होंने कहा कि यह जांच कुछ भी नहीं, बस सच को छुपाने की कोशिश की जा रही है।

परवेज़ ने कहा कि वह चाहते हैं कि एक बार रिपोर्ट विधानसभा में पेश होने के बाद उन्हें रिपोर्ट की एक कॉपी मिल जाए ताकि वह प्रावधानों के मुताबिक इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे सकें।

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