श्रीलंका में मुस्लिम विरोधी हमले चिंताजनक

श्रीलंका में मुस्लिम विरोधी हमले चिंताजनक

श्रीलंका के कैंडी में मुस्लिम विरोधी हमलों के बाद श्रीलंका में देशव्यापी आपातकाल लागू किया गया था। उस सप्ताह की शुरुआत में कई मस्जिद, दुकानों और घरों में आग लगा दी गई थी। घटना सिंहली समुदाय के एक 41 वर्षीय व्यक्ति की कुछ मुसलमानों ने पिटाई की थी और तभी से वहां तनाव बना हुआ है।

संदिग्ध आरोपी को बाद में गिरफ्तार किया गया। बाद में हिंसा को लेकर मस्जिदों, मुस्लिम स्वामित्व वाली दुकानों और घरों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं ने श्रीलंका में मुस्लिमों के बीच चिंता और असुरक्षा पैदा कर दी है। इस दौरान कम से कम चार व्यक्तियों की मौत हो गई और 80 से ज्यादा घायल हो गए।

श्रीलंका में साल 2012 से ही सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हुई है. कहा जाता है कि एक कट्टरपंथी बौद्ध संगठन (बीबीएस) इस तनाव को हवा देता रहता है। पिछले दो महीने के भीतर गॉल में मुसलमानों की मिल्कियत वाली कंपनियों और मस्जिदों पर हमले की 20 से ज़्यादा घटनाएं हो चुकी हैं।

2013 मेंसिंहली-बौद्ध समूहों की अगुवाई में कोलंबो में मुस्लिम की दुकानें जलाई गयीं। मुस्लिम देश की आबादी का 9 प्रतिशत हिस्सा हैं जहां मुस्लिमों ने एक अलग जातीय समूह के रूप में मान्यता मांगी है। सरकार ने हमलों की निंदा की है। साल 2014 में कट्टरपंथी बौद्ध गुटों ने तीन मुसलमानों की हत्या कर दी थी जिसके बाद गॉल में दंगे भड़क गए।

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