लन्दन की पहली मस्जिद जिसने जकात में बिटकॉइन स्वीकार किया

लन्दन की पहली मस्जिद जिसने जकात में बिटकॉइन स्वीकार किया
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लंदन। डैक्सटन की एक मस्जिद रमजान में जकात और सदका लेने वाली पहली मस्जिद बन गई। जकात इस्लाम मजहब के पांच अहम् फ़र्ज़ों में से एक है, जिसको सभी पात्र मुसलमानों को अदा करने का आदेश है। मजहबी जानकारों ने घोषणा की कि बिटकॉइन अल्लाह की नजर में स्वीकार्य है, अगर यह “वैध तरीके से लेनदेन” है।

मुसलमान रमजान में दान के लिए दो अलग-अलग क्रिप्टोकैरियां-बिटकॉइन और एथेरियम का उपयोग कर सकते हैं, जिन्हें जकात या सदका कहा जाता है। मस्जिद के एक जिम्मेदार जायद अल खैर ने ‘द डेली टेलीग्राफ’ को बताया कि यदि धन का वैध तरीके से लेनदेन किया जाता है तो यह हलाल है।

मस्जिद रमजान में ट्रस्टी बोर्ड के अध्यक्ष एरकिन गुनी, मस्जिद के इस्लामी सलाहकार जायद अल खैर और ब्लॉकचेन व्यवसाय के संस्थापक गुरमित सिंह इस नई पहल के पीछे लोगों को कम से कम 10,000 डालर बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। गुनी ने बताया कि हम नई मुद्रा के साथ अपील करने की कोशिश कर रहे हैं।

हमने अपने समुदाय के बाहर समृद्ध मुसलमानों के लिए एक मंच स्थापित किया है ताकि मस्जिद का समर्थन और दान किया जा सके। दान राशि में मस्जिद में आवश्यक मरम्मत करने के लिए उपयोग किया जाता है और मुस्लिम परिवारों की सहायता के साथ गरीबों को आश्रय दे रहे हैं।

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