मद्रास उच्च न्यायालय ने पॉपुलर फ्रंट पर प्रतिबंध लगाने की याचिका खारिज कर दी

मद्रास उच्च न्यायालय ने पॉपुलर फ्रंट पर प्रतिबंध लगाने की याचिका खारिज कर दी
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चेन्नई। मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही देश के पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) नामक संगठन पर प्रतिबंध लगाने वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। मुस्लिम मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत के अनुसार वह यह तय नहीं कर सकता कि किन संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और कौन से संगठन जारी रह सकते हैं।

याचिकाकर्ता के गोपीनाथ ने केंद्र और राज्य सरकार से पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने के लिए उच्च न्यायालय की शरण ली थी। LiveLaw.in के अनुसार, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि पॉपुलर फ्रंट एक चरमपंथी और आतंकवादी इस्लामी कट्टरपंथी संगठन है और इस प्रकार इसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। उन्होंने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि उनकी मांग पर विचार करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया जाए।

मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति पीटी आशा की पीठ ने पिछले शुक्रवार (8 जून) को अपने आदेश में कहा: ‘न्यायालय यह तय करने के लिए नहीं है कि कौन से संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और कौन से संगठन जारी रह सकते हैं। यह राज्य की दायरे में है’।

पीएफआई एक पंजीकृत संगठन है जो 17 राज्यों में सक्रिय है और यह देश के विभिन्न हिस्सों में मुसलमानों और अन्य पिछड़े समुदायों के मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दों को दृढ़ता से उठा रहा है। यह भाजपा शासित झारखंड में पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इस साल फरवरी में, राज्य सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगाया था।

पॉपुलर फ्रंट का राजनीतिक विंग सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) देश के तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों में स्थानीय चुनावों में सक्रिय है। उसने दर्जनों नगरपालिका सीटें जीतीं हैं। हाल ही में कर्नाटक में तीन विधानसभा सीटों में चुनाव लड़ा जहां इसके उम्मीदवार दूसरे या तीसरे स्थान पर रहे।

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