मेजर जनरल ने किया दारुल उलूम देवबंद का दौरा, अब आर्मी में भर्ती होंगे छात्र!

मेजर जनरल ने किया दारुल उलूम देवबंद का दौरा, अब आर्मी में भर्ती होंगे छात्र!

देवबंद स्थित दारुल उलूम के डेढ़ सौ साल के इतिहास में सेना के वरिष्ठ अधिकारी शनिवार को पहली बार वहां पहुंचे। उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड जोन के भर्ती निदेशालय के एडीजी मेजर जनरल डा. सुभाष शरण ने दारुल उलूम के युवाओं को भारतीय सेना और सेना में अवसरों की जानकारी दी।

बताया कि सेना में मौलवी डिग्रीधारक युवाओं के लिए सेना में धर्म गुरु के लिए रास्ते खुले हैं। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अब्दुल कासिम नौमानी ने इस पहल की वजह पूछी तो एडीजी सुभाष शरण ने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास के आह्वान से प्रेरित है।

जागरण डॉट कॉम के अनुसार, मेजर जनरल सुभाष शरण ने बताया कि वे यह जानकर हैरत में पड़ गए कि आज तक दारुल उलूम के किसी भी छात्र ने सेना में धर्म गुरु के लिए आवेदन नहीं किया।

बताया कि सेना की भर्ती निदेशालय की ओर से दारुल उलूम को सभी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान किए जाएंगे, जिससे वह युवाओं को सेना में भर्ती के योग्य प्रशिक्षित कर सकें। शरण ने अफसोस जाहिर किया कि सेना में बड़ी संख्या में मौलवी के पदों पर भर्ती होती है, लेकिन ज्यादातर सीटें खाली ही रह जाती हैं।

सेना में पंडित, गोरखा पंडित, मौलवी सुन्नी व शिया, पादरी, ग्रंथी और बौद्ध मोंक यानी महायान नियुक्त होते हैं। इसके लिए शास्त्री, मौलवी या ज्ञानी की डिग्री होनी चाहिए।

पादरी अभ्यर्थी के लिए स्थानीय बिशप से मान्यता प्राप्त हो और इसी तरह महायान भी संबंधित अथॉरिटी से मान्यता प्राप्त बौद्ध भिक्षु होने चाहिए। इनका काम बटालियन में स्थित धार्मिक स्थलों में पूजा या इबादत कराना होता है।

भ्रमण के दौरान एडीजी ने दारुल उलूम के शिक्षकों व छात्रों को श्रीमदभगवद्गीता में निहित युद्ध रणनीतियों की जानकारी दी। बताया कि गीता मनुष्य के जीवन में मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है।

उन्होंने दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नौमानी को इस्कॉन के संस्थापक आचार्य एसी भक्ती वेदांत प्रभुपद द्वारा लिखी श्रीमदभगवद्गीता की अलग-अलग भाषा में प्रतियां भेंट कीं।

नौमानी ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि डेढ़ सौ साल के इतिहास में पहली बार कोई सैन्य अधिकारी दारुल उलूम में युवाओं को सेना में करियर की राह दिखाने के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने मेजर जनरल सुभाष शरण को दारुल उलूम के इतिहास पर लिखी किताब भी भेंट की।

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