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खाड़ी देशों में घट रही हैं नौकरियां, वापस लौटने की योजना बना रहे हैं भारतीय

नई दिल्ली। धीमी अर्थव्यवस्था के चलते, खाड़ी देशों में नौकरी की संभावनाएं घट रही हैं। दुबई में रहने वाले भारतीय परिवार अब कामकाजी नीतियों और बढ़ती कीमतों के कारण घर लौट रहे हैं। जो लोग एक दशक पहले दुबई चले गए थे, अब उन्हें अपने परिवारों को बनाए रखने में कठिनाई हो रही है क्योंकि तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में डुबकी लगा रही हैं।

अलीगढ़ के साहिल कहते हैं कि यहां शिक्षा महंगी है। मेरी दो बेटियां हैं और उनमें से एक बाल विहार में जाती है। मेरी पत्नी के पास भी नौकरी थी। अमीर, जो एक दशक पहले दुबई गए थे, अब वापस लौटने की योजना बना रहे हैं। हालांकि उनकी आय में उतार-चढ़ाव हुआ है, खर्च तेजी से बढ़ रहे हैं।

अमीर कहते हैं कि भारतीय मुद्रा में, उनकी बेटी की स्कूल फीस करीब 2 लाख रुपये है और अब हमें पहले के विपरीत करों का भुगतान करना होगा। केरल एक राज्य है, जहां से रोजगार की तलाश में मजदूरों की सबसे बड़ी संख्या खाड़ी देश में जाती है।

अनुमानित 6 मिलियन प्रवासित भारतीयों में से 2.5 मिलियन केरल से हैं, ज्यादातर बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान जैसे देशों में काम कर रहे हैं।  

पिछले महीने जेद्दाह में लगभग 4,000 भारतीय परिवारों को अपने बच्चों को अगले शैक्षिक वर्ष के लिए फिर से नामांकित नहीं किया गया था। 2014 में, भारतीय प्रवासियों की संख्या 2.4 मिलियन से 2.24 मिलियन हो गई।

खाड़ी में कार्य परमिट नवीकरण शुल्क और कर भारतीयों के लिए चिंता का एक और कारण हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीयकरण नीतियां अब कुछ उद्योगों में भर्ती में स्थानीय लोगों को वरीयता देते हैं।

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