मौलाना असरारुल हक़ क़ासमी: मिल्लत- ए- कौम एक अज़ीम शख्सियत से महरुम हो गयी

मौलाना असरारुल हक़ क़ासमी: मिल्लत- ए- कौम एक अज़ीम शख्सियत से महरुम हो गयी

कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता और किशनगंज से सांसद मौलाना अशरारुल हक के निधन से अल्पसंख्यक बहुल सीमांचल में शोक की लहर दौड़ गई है। क्योंकि उनकी शख्सियत ही कुछ ऐसी थी। उन्होंने जनता के साथ कभी भी हिन्दू और मुस्लिम के नाम पर भेद- भाव नहीं किया. वे कांग्रेस पार्टी के टिकट से लगातार दूसरी बार सांसद थे।

मौलाना अशरारुल हक जन्म 15 फरवरी 1942 को हुआ था। वे छात्र जीनव से लेकर 76 वर्ष की उम्र तक राजनीति में सक्रिय रूप से रहे। वो पहली बार साल 2009 में कांग्रेस के टिकट पर किशनगंज से चुनाव जीतकर संसद भवन पहुंचे थे। फिर साल 2014 में भी वे किनशगंज से ही काफी मतों से सांसद चुने गए थे।

मौलाना अशरारुल हक अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में 2 बेटी और 3 बेटे हैं। वे एक ख्यातिप्राप्त वक्ता और लेखक थे। वे आए दिन देश- विदेश में अपने सामाजिक सम्बोधन के लिए सांसद होने के बावजूद भी जाया करते थे।

मौलान के निधन से कांग्रेस नेताओं ने शोक जताते हुए आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है। फिलहाल उनके शव को उनके गांव ताराबाड़ी में रखा गया है। जहां से जनाज़े की अंतिम नमाज के बाद उन्हें सुपुर्दे खाक किया जाएगा।

साभार- ‘न्यूज़ 18’

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