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न कोई सरकारी आदेश और न ही कोई कानूनी नोटिस, फिर भी बंद कराई जा रही हैं मीट की दुकानें

19 मार्च को योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही अचानक मीट बाज़ार में कोहराम मच गया, ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू हो गई। लेकिन हैरानी वाली बात ये है कि इस कार्यवाई के लिए न तो कोई सरकारी आदेश है और न ही कोई कानूनी नोटिस, कुछ है तो एक योगी फ़रमान, और उस फरमान के तहत दुकानें और बूचड़खाने सील करने के साथ ही एफआईआर भी दर्ज हो रही हैं।

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अधिकारी से यह पूछने पर कि कब तक दुकान बंद रखना है, वे बताते हैं कि जब तक सरकार की ओर से कोई आदेश नहीं आ जाता। अब सरकारी आदेश कब तक आयेगा कुछ पता नहीं। सवाल यह है कि सरकारी आदेश का ही इंतजार है तो यह सब किसके आदेश पर हो रहा है।

ख़बर के मुताबिक़ मीट विक्रेताओं के पूछने पर अधिकारी बताते हैं कि आप लोगों के पास लाइसेंस नहीं है। तो क्या लाइसेंस बनवाने या पुराने लाइसेंस रेन्यु करने पर दुकान खोल सकते हैं, इस पर अधिकारियों ने दुकान खोलने से साफ इनकार कर दिया।

गाजियाबाद इस्लामनगर के मीट विक्रेता मोहम्मद सलीम और नसीम के मुताबिक़ जब पुलिस और नगर निगम अधिकारियों से इस संबंध में पूछा तो उन्होंने कहा कि जब तक नए लाइसेंस बनाने और पुराने को रेन्यु का नई सरकार की ओर से कोई आदेश नहीं आ जाता है, तब तक आप लोग दुकान नहीं खोलेंगे।

मुर्गे बेचने वाले दुकानदारों को भी चेतावनी दी जा रही है। कई जगह तो नगर निगम के अधिकारियों ने आवेदन लेने से ही इनकार कर दिया। और जहां आवेदन लिए जा रहे हैं वहां के बारे में यह नहीं कह सकते कि कब तक लाईसेंस बनेगा।

इस बीच यह बात काबिलेगौर है कि हजारों लोग बेरोज़गार हो गए हैं मीट का एक्सपोर्ट ठप हो गया है, और कुछ दिन अगर ऐसे ही हालात रहे तो होटल भी बंद हो जाएंगे।

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