Monday , July 23 2018

पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा : ‘शरीया कोर्ट’ पर मीडिया के एक वर्ग की रिपोर्ट फ़र्ज़ी

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने मंगलवार को देश के प्रत्येक जिले में ‘शरीया कोर्ट’ स्थापित करने की अपनी योजना के बारे में फ़र्ज़ी खबर फैलाने के लिए मीडिया के एक वर्ग पर निशाना साधा।

बोर्ड ने ट्वीट कर कहा, उसने कभी समानांतर अदालत प्रणाली की मांग नहीं की। इसके तहत दारुल कजा चल रहे हैं। हमारे दारुल कजा केवल मध्यस्थता केंद्र हैं जो समाज की मदद कर रहे हैं। ऐसी फ़र्ज़ी खबरों को अनदेखा करें।

बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने कहा कि 15 जुलाई को नई दिल्ली में बोर्ड की बैठक के एजेंडे पर नए ‘दारुल कजा’ की स्थापना का कोई प्रस्ताव नहीं था। हमने 1993 में अपना पहला केंद्र स्थापित किया था और तब से कई केंद्र बने हैं। उनकी प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर बोर्ड को प्रस्तुत की जाती है।

उनका कहना था कि हम उन्हें ‘शरीया अदालत’ नहीं कहते हैं जैसा कि मीडिया के एक वर्ग द्वारा फैलाया जा रहा है। इस विवाद को रोकने और इन केंद्रों की वैधता को चुनौती देने का एक ऐसा ही प्रयास पहले भी किया गया था तब सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसने 2014 में अपनी वैधता बरकरार रखी।

बोर्ड की कार्यकारी परिषद के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि इन प्रचार और गलतफहमी का मुकाबला करना सही है। जिस तरह से महिलाओं सदस्यों ने तीन तलाक़ को लेकर देशव्यापी विरोध का नेतृत्व किया वह उससे बहुत खुश हैं। इस अभियान ने न केवल जागरूकता पैदा की बल्कि मुसलमानों और गैर-मुस्लिम दोनों के बीच गलत धारणाओं को दूर करने में भी मदद की।

इस बीच, उत्तर प्रदेश के शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने इन केंद्रों की स्थापना के लिए बोर्ड पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, ने मंगलवार को कहा कि उन्हें पाकिस्तान की जमात-ए-इस्लामी से उनके बयान के लिए मौत की धमकी मिली है। मदरसों पर उनकी विवादास्पद टिप्पणियों के लिए कुछ मुस्लिम संगठनों से खतरे के बाद रिजवी को राज्य सरकार द्वारा वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है।

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