Thursday , July 19 2018

मेरठ : दलित युवक गोपी पारिया की मौत के बाद हमलों के डर से गांव छोड़ रहे हैं दूसरे लोग

मेरठ। जिले के शोभापुर गांव में इन दिनों मातम पसरा हुआ है। यहां पर सौ से ज्यादा घरों के सदस्य 28 साल के दलित युवक गोपी पारिया की मौत से उदास हैं। एससी-एसटी ऐक्ट को लेकर हुए भारत बंद के दौरान मेरठ के हिंसक प्रदर्शनकारियों की लिस्ट में गोपी का नाम सबसे ऊपर लिखा गया था जिसके दो दिन बाद गोपी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सूची किसने तैयार की थी लेकिन गांव में दलित वर्ग के लोग उच्च जाति के लोगों पर इसके लिए आरोप लगा रहे हैं। स्थानीय दलित परिवारों का कहना है कि क्षेत्र में गोपी के बढ़ते प्रभाव से कुछ लोग असहज थे। उनका दावा है कि उच्च जाति के लोगों द्वारा कड़ा संदेश देने के लिए गोपी को बदले की आग में मारा गया।

इस लिस्ट में दूसरे दलित युवकों का भी नाम है जिन्हें स्थानीय पुलिस को सौंपा गया था। गोपी की हत्या के बाद उनके मन में भी डर बैठ गया है और इसलिए वह हमलों के डर से गांव छोड़ कर जा रहे हैं। जो दलित युवक यहीं पर रुके हुए हैं उनका कहना है कि वह 14 अप्रैल को प्रतिरोध की भावना को जिंदा रखने के लिए आंबेडकर जयंती मनाएंगे।

शोभापुर गांव के रहने वाले 41 वर्षीय अशोक कुमार का कहना है, ‘गोपी की हत्या और हमारे बच्चों के गांव छोड़कर जाने की वजह से इस बार 14 अप्रैल का आयोजन पहले जैसा नहीं होगा। लेकिन अगर हम आंबेडकर जयंती नहीं मनाएंगे तो यह उच्च जाति के लोगों की दूसरी जीत जैसी होगी। हम इसे होने नहीं देंगे।’

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