Monday , September 24 2018

मिलिए अफजल गुरू के बेटे गालिब गुरू से, जो डॉक्टर बनकर ग़रीब अवाम की सेवा करेंगे

पिछले चार पांच दिनों से सोशल मीडिया पर एक लड़की के चर्चे जोरो पर है। जिन्हें एक ही रात में 11 लाख फॉलोवर हो गए, फिर इसी बीच भावना आहत होने के कारण पुलिस केस हो गया मतलब और चर्चा। लेकिन इन सबके बीच एक वो नाम जिसका चर्चा पूरे देश मे होना चाहिए था। वो युवा जो देश मे फैलाई जा रही नफरत का संघ परिवार के एजेंडे का का मुंहतोड़ जवाब है।

जी हाँ, ग़ालिब गुरु अफ़ज़ल गुरु के बेटे ,जिसके बाप को सुबूत और गवाह न होने के बावजूद अदालत महज़ जनभावनाओं के नाम पर फांसी की सज़ा सुना दिया और सरकार अपने आप को देशभक्त होने के नाम पर बगैर परिवार को बताए फांसी पर टांग दे उसी अफ़ज़ल के बेटे हैं ग़ालिब।

यूपीयूके लाइव डॉट कॉम के मुताबिक, ग़ालिब जब दो साल के थे तब उनके बाप को गिरफ्तार कर लिया गया साल में कभी कभार ही वो अपने बाप से मिल पाते ,एक बार जब वो अपनी माँ के साथ दिल्ली में एक होटल में में रुके थे तो जाड़े की आधी रात में ही होटल वाले ने उन्हें भगा दिया और बाकी की रात उन्होंने सड़क पे ही गुज़ारी जब बाप से मिलने आते तो पुलिस वाले औऱ लोगो की गालिया और आतंकी के बेटे के खिताब मिलते।

ग़ालिब कहते है कि मेरे बाप को शायर ग़ालिब बहुत पसंद थे इसलिए उन्होंने मेरा नाम ग़ालिब रखा ,साल में एक बार रक्षाबंधन के दिन ही उनसे मुलाकात होती थी मैं ग़ालिब के शेर याद कर के उनको सुनाया करता था। इन सब ज़ख्मो और समाज से मिले दर्द के बावजूद ग़ालिब भटके नही और हाई स्कूल में 95% अंक हासिल करके पूरी घाटी में अव्वल आये और इंटरमीडिएट में 88.6% में डिस्टिंक्शन के साथ पास हुए।

ग़ालिब कहते है हमारे साथ जो न इंसाफी हुई इसका हमे एहसास है लेकिन मेरा मक़सद डॉक्टर बन कर समाज के गरीब और दबे कुचले लोगो की खिदमत करना है जिसका वादा मेरे बाप ने मुझसे लिया था और जो मेरे बाप का ख्वाब है। ग़ालिब मेरे हीरो है जो इस नफरत के माहौल में मोहब्बत की खिदमत की और अन्याय से सही दिशा में लड़ने की ज़िंदा मिसाल है।

ग़ालिब हम जैसे तमाम लोगो की उम्मीद और ऊर्जा भी है जो इस नाइंसाफी के खिलाफ खड़े हो रहे है और कुछ करने की कोशिश कर रहे है।

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