Sunday , September 23 2018

मिलिए कश्मीरी पंडित एसएसपी रमेश कुमार से जिन्होंने आसिफा मामले में झकझोर देने वाली सच्चाई से रू-ब-रू कराया

जहां एक तरफ कुछ लोग धर्म के आधार पर आरोपियों के बचाव में नारे लगा रहे थे, वहां ये जानना भी जरूरी है कि जल्ला एक कश्मीरी पंडित हैं और उनका परिवार भी उन हजारों परिवारों में से है जिन्हें कट्टरपंथियों के डर से अपना घर और प्रॉपर्टी छोड़कर कश्मीर से जाना पड़ा था लेकिन उन्होने ऐसे वक्त में अपना काम बखूबी निभया जब ये केस धर्म के आधार पर अलग नजरों से देखा जा रहा था।

जम्मू कश्मीर क्राइम ब्रांच के एसएसपी रमेश जल्ला की टीम के ऊपर 8 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने और उसे बेदर्दी से मारने वाले गुनहगारों का पता लगाने के लिए उनके पास 90 दिनों की समय सीमा थी लेकिन उन्होने रिकॉर्ड टाइम में तफ्तीश पूरी कर ली और 9 अप्रैल यानी वक्त से 10 दिन पहले ही चार्जशीट दायर कर दी।

जल्ला की टीम के जुटाए हुए सबूतों की वजह से ही उस मासूम की वो दर्दनाक कहानी सामने आ पाई जिसने देश भर में लोगों को झकझोर दिया। तफ्तीश के दौरान जल्ला को कई स्थानीय समूहों से विरोध का सामना करना पड़ा, यहां तक की उन्हें धमकियां भी मिलीं पर इससे उनके काम पर कोई असर नहीं पड़ा।

इस केस की दीपिका वकील हैं जो मानवआधिकारों के लिए काम करती हैं। बच्ची के परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण जब उनके पास वकील नहीं था तब दीपिका ने उनके केस की जिम्मेदारी ली। जब उन्हें इस केस की खबर लगी तो उन्होने खुद पीड़ित के माता-पिता को संपर्क किया और केस लड़ने की पेशकश की।

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