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MGNREGA की मजदूरी खेतों में काम करने वाले मजदूरों से भी कम- रिपोर्ट

नई दिल्ली। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी सेवा अधिनियम (मनरेगा) के तहत भुगतान की गयी मजदूरी के संशोधन कमेटी ने पाया है कि 15 राज्यों में मनरेगा की मजदूरी से खेतिहर मजदूर ज्यादा रोजाना मजदूरी कमाते हैं।

मनरेगा मजदूरी में की गई बढ़ोतरी का अनुमान है कि मनरेगा के तहत मिलने वाली मजदूरी में बढ़ोतरी करने से लगभग 4,500 करोड़ के बजट की जरूरत होगी।

इसके आधार पर पैनल, ग्रामीण विकास मंत्रालय के अलावा सचिव नागेश सिंह 1 महीने में अपनी सिफारिशें लागू करने की उम्मीद कर रहे हैं।कमेटी की ओर से पेश किए गए आकड़ों के मुताबिक कर्नाटक, पंजाब, झारखंड, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, मिजोरम और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मनरेगा की मजदूरी खेतिहर मजदूरों से भी बहुत कम है।

इसके अलावा अन्य राज्यों भी मनरेगा के मजदूरी को बढ़ाने में असफल रहे हैं उनमें सिक्किम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, मध्यप्रदेश और बिहार शामिल हैं। हालांकि राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में मनरेगा मजदूरी में मामूली सी बढ़ोतरी की गई है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि अगर इसके लिए संशोधन किया जाता है तो इसके लिए लगभग वर्तमान मनरेगा बजट में 4,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की आवश्यकता होगी।

इन 15 राज्यों में जहां मनरेगा की मजदूरी बहुत कम है। इसके लिए हमने राज्यों की ओर से दी जाने वाली न्यूनतम कृषि मजदूरी के समान लाने की कोशिश की है।

आपको बता दें कि पिछले दिनों झारखण्ड के मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने राज्य के न्यूनतम मजदूरी के बीच बढ़ते हुए गतिरोध के खिलाफ ग्रामीण विकास मंत्रालय को एक पत्र लिखा था।

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