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माइनॉरिटी शिक्षा के मामले में मुसलमान, सबसे कम सुविधा पाने वाला समुदाय: रिपोर्ट

अल्पसंख्यकों में मुस्लिम शिक्षा के मामले में सबसे सुविधाहीन समुदाय है। सरकार से सहायता प्राप्त एजेंसी द्वारा गठित किए गए पैनल की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इसमें शिक्षा के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए तीन स्तरीय नीति की अनुशंसा की गई है।

इसके तहत केंद्रीय विद्यालय, कम्युनिटी कॉलेज और राष्ट्रीय संस्थान हैं। इसमें शिक्षा में प्रवीणता के लिए इसका तीन स्तरों प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तर की अधोसंरचना बनाने की सिफारिश की गई है।

इसके लिए 211 स्कूल, 25 कम्युनिटी कॉलेज और पांच राष्ट्रीय संस्थान खोलने की सिफारिश की गई है।प्रस्तावित स्कूल केंद्रीय या नवोदय विद्यालय का अनुसरण करें। कम्युनिटी कॉलेज में खुला मॉडल अपनाया जा सकता है।

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि ये सिफारिशें केंद्र सरकार की अल्पसंख्यक के शैक्षिक सशक्तीकरण के अनुरूप ही हैं। हम अभी रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं। हम उन मामलों को ढूंढेंगे जिन्हें सरलता से लागू किया जा सकता है। उठाए जा सकने वाले कदम अगले शिक्षा सत्र से लागू कर दिए जाएंगे। 29 दिसंबर को मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन ने 11 सदस्यीय कमेटी बनाई थी। पूर्व सचिव अफजल अमानुल्लाह को इसका संयोजक बनाया गया था।

कमेटी ने रिपोर्ट में कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार मुस्लिमों में साक्षरता दर 68.53 फीसदी है। जबकि राष्ट्रीय औसत 72.98 फीसदी है। मुस्लिमों में नामांकन दर 74 फीसदी है जबकि शेषष जनसंख्या में यह 83 फीसदी है। यह अंतर भी अधिक है।

 

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