इन राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक घोषित करने की मांग, आयोग बोला – यह हमारा काम नहीं

इन राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक घोषित करने की मांग, आयोग बोला – यह हमारा काम नहीं

देश में अल्पसंख्यक की परिभाषा तय करने की भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की मांग पर अल्पसंख्यक आयोग का कहना है कि इस मांग पर विचार करना अल्पसंख्यक आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है. यह केंद्र सरकार के दायरे में आता है कि किसे अल्पसंख्यक का दर्जा दे. अश्विनी उपाध्याय का कहना है कि आठ राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं लेकिन उन्हें अल्पसंख्यकों को मिलने वाला विशेष लाभ नहीं मिलता. आयोग ने याचिकाकर्ता उपाध्याय को लिखित जवाब भेजा है.

सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल अर्जी में अश्विनी उपाध्याय का कहना है कि आठ राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं. इसके बाद भी उन्हें अल्पसंख्यकों के लिए निर्धारित कोई लाभ नहीं मिलता. 2017 में शीर्ष अदालत ने उपाध्याय को अल्पसंख्यक आयोग के समक्ष अपनी बात रखने के लिए कहा था. उनके ही ज्ञापन के जवाब में अल्पसंख्यक आयोग ने अब यह जवाब दिया है.

उपाध्याय का कहना है कि भारतीय संविधान या किसी भी भारतीय कानून में “अल्पसंख्यक” शब्द की परिभाषा या व्याख्या नही है. अल्पसंख्यक का शाब्दिक अर्थ है, ‘ बहुत कम संख्या वाला’. वर्तमान समय में अल्पसंख्यक शब्द का इस्तेमाल मुसलमान और ईसाइयों के लिए ही होता है. आपातकाल में इंदिरा गांधी ने 20 सूत्रीय कार्यक्रम मुसलमानों को ध्यान में रखकर ही बनाया था. 1986 की नई शिक्षा नीति में प्रस्तावित अल्पसंख्यक बहुल 40 जिलों की सूची भी मुसलमानों की जनसंख्या को ध्यान में रखकर तैयार हुई थी.

2011 की जनगणना के अनुसार 28 राज्यों में से सात (जम्मू और कश्मीर, पंजाब, अरुणाचल, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम तथा मेघालय ) और सात केंद्र शासित प्रदेशों से एक लक्षद्वीप में हिंदू अल्पसंख्यक हैं. हिंदू अल्पमत वाले इन आठ में से तीन (नगालैंड, मिजोरम तथा मेघालय) में ईसाई और दो (जम्मू और कश्मीर, लक्षद्वीप) में मुस्लिम जबकि पंजाब में सिख बहुसंख्यक हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार देश के कुल 640 जिलों में से 110 में हिंदू अल्पसंख्यक हो गया है.

 

 

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