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सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय लेने वाली मोदी सरकार जवानों की आत्महत्याओं पर चुप क्यों?

नई दिल्ली: बात कुछ ज्यादा पुरानी नहीं है कि सेना द्वारा पाकिस्तान में घुसकर आतंकी अड्डों को तबाह करने की खबर सुर्ख़ियों में थी। उसी के साथ सुर्ख़ियों में थी मोदी सरकार जिसका हर नेता हर कहीं सर्जिकल स्ट्राइक को मोदी सरकार की उपलब्धि बता रहा था।

बात सर्जिकल स्ट्राइक की हो या बीजेपी नेताओं द्वारा दूसरे के कामों का श्रेय लेने की दोनों ही बातों पर कितनी भी लंबी बहस की जा सकती है लेकिन चलिए रूख करते हैं मुद्दे की ओर।

देश की सरहदों पर दिन रात पहरा दे रहे देश के जवानों के हालात से पूरा देश वाकिफ है। पिछले कुछ महीनों में सामने आई वीडियोज से पता चला है कि किस तरह उन्हें कई बार तो आधा पेट कहना खाकर भी दिन गुजारना पड़ता है। सेना के जवान तो फिर भी कैसे भी करके अपनी ज़िम्मेदारी बखूभी निभा रहे हैं। हाँ, अगर देश के जवानों के प्रति कोई अपनी ज़िम्मेवारी नहीं निभा रहा तो वो है देश की सरकार। सरकार पर लगा यह इलज़ाम बेबुनियाद नहीं है बल्कि इस बात के पुख्ता सबूत मौजूद हैं।

जानकारी के मुताबिक शुक्रवार के दिन लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए खुद केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने बताया है कि देश की सेवा में तैनात सैनिकों में से करीब 125 सैनिकों ने पिछले साल किसी न किसी वजह से ख़ुदकुशी की है। वहीँ इस साल का आंकड़ा 13 तक पहुँच चुका है।

हैरानी की बात है कि लगातार मुश्किल इलाकों में तैनात रहने वाले जवानों के डिप्रेशन में चले जाने के मामलों के सामने आने के बावजूद भी सरकार या मंत्रालय की तरफ से जवानों की सेहत को ठीक बनाये रखने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं। कदम उठाये जा रहे हैं तो सिर्फ पार्टी के लिए वाहवाही लूटने के लिए।

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