टाइम पत्रिका ने मोदी की तस्वीर को बनाया कवर, शीर्षक दिया भारत को बांटने वाला प्रमुख व्यक्ति

   

अमेरिकी समाचार पत्रिका टाइम ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को अपने 20 मई के कवर पेज पर एक शीर्षक के साथ दिखाया है जो चुनावी मौसम के बीच पूरे भारत में विवाद पैदा कर सकता है। इस बार विदेशी मीडिया में पीएम मोदी को लेकर फील गुड फैक्टर का अभाव दिखाई दे रहा है। पत्रिका ने पीएम की इस फोटो के साथ विवादित शीर्षक दिया है। हेडलाइन में लिखा है “इंडियाज डिवाइडर इन चीफ” यानि भारत को बांटने वाला प्रमुख व्यक्ति बताया गया है जो कि प्रधानमंत्री का कैरिकेचर है और मोदी की आलोचना करता है। यह शीर्षक पत्रिका में लेख से संबंधित है, जिसे आतिश तासीर ने लिखा है, “क्या मोदी सरकार के पांच साल पूरे हो सकते हैं?
http://time.com/magazine/asia/लेख में लिखा गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के धर्मनिरपेक्षता के विचार की तुलना मोदी के तहत प्रचलित सामाजिक “तनाव” से की गई है, जिसने “हिंदू और मुस्लिमों के बीच भाईचारे की भावनाओं को बढ़ावा देने की कोई इच्छा नहीं है”। इसके अलावा, इस लेख ने गुजरात दंगों को भी याद किया। पीएम पर लिखे आर्टिकल में भाजपा के हिंदुत्व की राजनीति का हवाला दिया गया है। पूरा लेख हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर आधारित है और मोदी पर हिंदू समर्थक होने का आरोप लगाता है। लेखक के अनुसार भाजपा की हिंदुत्व की राजनीति के कारण वोटरों के ध्रुवीकरण की बात कही गई है। आर्टिकल के शुरुआत में ही लिखा गया है कि महान लोकतंत्रों का पापुलिज्म की तरफ झुकाव, भारत इस दिशा में पहला लोकतंत्र होगा। कवर स्टोरी का शीर्षक है, क्या दुनिया की सबसे बड़ा लोकतंत्र मोदी सरकार को फिर पांच साल के लिए भुगतेगा? स्टोरी के लेखक आतिश तासीर लोकतंत्रों में बढ़ते पॉपुलरिज्म की बात करते हैं। वे तुर्की, ब्राजील, ब्रिटेन और अमेरिका का भी हवाला देते हैं।

यह पहली बार नहीं है जब पत्रिका मोदी के बारे में आलोचनात्मक टिप्पणी लेकर आई है। 2012 में अपने प्रकाशित लेख में, पत्रिका ने उन्हें एक विवादास्पद, महत्वाकांक्षी और एक चतुर राजनेता के रूप में वर्णित किया था। लेखक साल 2002 के गुजरात दंगों के समय नरेंद्र मोदी की चुप्पी साधने का आरोप लगाता है। साथ ही उन्हें भीड़ का दोस्त साबित करता है। लेख में गाय के मामले में भीड़ हिंसा को लेकर प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। लेख में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के धर्मनिरपेक्षता के विचार और मोदी के शासनकाल में प्रचलित सामाजिक की तुलना की गई है। पहले भी कर चुका है आलोचना यह पहली बार नहीं है जब मैग्जीन ने नरेंद्र मोदी की आलोचना की हो। इससे पहले साल 2012 में भी मैग्जीन ने नरेंद्र मोदी को विवादास्पद, महत्वाकांक्षी और एक चतुर राजनेता बताया था।