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लव जिहाद और गौरक्षा पर हत्या, लगता है राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग बेअसर हो गया है: पूर्व चीफ जस्टिस

नई दिल्ली: भारत के पूर्व चीफ जस्टिस आर.एम. लोढ़ा ने गौरक्षा और लव जिहाद के नाम पर होने वाले बर्बर हत्याओं के बढ़ते रुझान पर अपनी गंभीर चिंता का इज़हार किया है।

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उन्होंने फिल्म पद्मावती पर विवाद पैदा करने पर कला की आज़ादियों को पेश होने खतरों के नाते भी अपनी फ़िक्र का इज़हार किया। रविवार को मानवाधिकार दिवस पर आयोजित एक समारोह से संबोधित करते हुए पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अप्रभावी हो गया है और इसकी स्थिति बिना दोंतों वाले शेर जैसी हो गई है।

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक लोढा ने कहा कि गौरक्षा के नाम पर इंसानों की हत्याएं हो रही है। गौरक्षक स्वतंत्र रूप से इधर उधर घूम रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता, कार्टूनिस्ट, कलाकार और छात्रों के खिलाफ देशद्रोह के आरोप लगाये जा रहे हैं।

गौरतलब है कि दो दिन पहले राजस्थान के राजसमन्द में कथित लव जिहाद के नाम पर अफराज़ुल इस्लाम को मारकर उसे बर्बर रूप से जिंदा जला दिया गया था। इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। लोढ़ा ने उसी से जुड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि जब दो वयस्क प्यार करने लगें तो क्या धर्म का उसमें कोई दखल होना चाहिए?

पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि देश में लव जिहाद के नाम पर लोगों को मारा जाता है और जो लोग मानव अधिकार के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, वे समाज के प्रति ज्वादेह नहीं होते। पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती, बल्कि वे ऐसे मामलों में लापरवाही करती है। लोढ़ा ने कहा कि हर दिन यह सवाल मुझे झिंझोड़ता रहता है।

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