मिस इंग्लैंड प्रतियोगिता में पहली बार मुस्लिम प्रतियोगी ने हिजाब पहन कर हिस्सा लिया

मिस इंग्लैंड प्रतियोगिता में पहली बार मुस्लिम प्रतियोगी ने हिजाब पहन कर हिस्सा लिया
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ऐसा पहली बार होगा जब कोई मुस्लिम युवती मिस इंग्लैंड कॉन्टेस्ट में हिजाब पहनकर हिस्सा लेगी। इससे पहले मारिया महमूद ने मिस बर्मिंघम में पहली रनरअप का खिताब जीता था।

अगर वो मिस इंग्लैंड के फाइनल तक पहुंचती है और उसमें जीत दर्ज करती है तो फिर वो मिस वर्ल्ड कॉन्टेस्ट में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला बन जाएंगी। मारिया अभी 20 साल की हैं, वो कहती हैं कि मुस्लिम समुदाय के सामने आने वाली नेगिटव छवि को चुनौती देना चाहती हूं।

वह कहती हैं कि वह विविधता और बहुसंस्कृतिवाद का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं।
मारिया ने यहाँ तक पहुँचने के लिए 30 अन्य महिलाओं के खिलाफ हिस्सा लिया। मैं हिजाब पहनकर बहुत घबरा रही थी क्योंकि मैं वहां अकेली हिजाब पहने थी।

जज मारिया के प्रदर्शन से प्रभावित थीं और आखिरकार वह प्रथम रनर-अप का मुकाबला करने के बाद शीर्ष 10 में पहुंचा, जिससे उसे सेमीफाइनल में एक स्थान मिला। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह अभी निर्णय नहीं ले पाई हैं कि वो तैराकी कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेंगी या नहीं।

उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई मुस्लिम युवतियों ने मिस इंग्लैंड का खिताब जीता है लेकिन तब उन लोगों ने हिजाब नहीं पहना था। मारिया बताती है कि उनके इस निर्णय पर दोस्तों के साथ-साथ घरवालों ने भी उनका खूब स्पोर्ट किया।

वहीं मारिया एक बेहतरीन समाजिक कार्यकर्ता बनना चाहती हैं। अभी वो साइकोलॉजी की छात्रा हैं। मारिया ने कहा कि आपको आत्मविश्वास से बोलने और एक अच्छा संदेश देने के लिए प्रेरित होने की जरूरत है।

मारिया अब सेमीफाइनल की ओर आगे बढ़ रही हैं जो जुलाई में न्यूर्कशामशर में आयोजित किया जाएगा। बुर्किनी के बारे में मुझे नहीं पता कि मैं इसको लेकर कैसा महसूस करती हूं। मैं अपने खुद कपड़े बनाती हूं, इसलिए मैं ऐसा कुछ कर सकती हूं।

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