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मुसलमानों के बारे में गलतफहमियां दूर करने के लिए अमेरिकी मुस्लिम अपने पड़ोसियों से संपर्क कर रहे हैं

हटिंगटन: न्यूयॉर्क के पास में स्थित एक रोमन कैथोलिक हाई स्कूल में जाकर दो दर्जन मुस्लिम छात्रों ने नमाज़ पढ़ी जबकि वर्दी में मेजबान स्कूल के छात्र उन्हें गौर से देखते रहे। इस दौरे का मकसद बहुत आसन था कि यह स्कूल जो केवल 16 किलोमीटर की दूरी पर हैं, लेकिन सांस्कृतिक रूप से एक दूसरे से ज़मीन-आसमान की दूरी पर हैं, एक दूसरे को जान सकें।

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यह एक अच्छी पहल का हिस्सा है जिसे बारिश के इस मौसम में अमेरिका के 80 इस्लामी स्कूल शुरू करेंगे, ताकि ऐसे समय में जब कई लोग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन द्वारा निशाना बनाए जाने की वजह से परेशान हैं, अमेरिकियों के दिल में मुसलमानों की बेहतर तस्वीर पेश करना चाहते हैं।

न्यूज़ नेटवर्क समूह न्यूज़ 18 के अनुसार एमडीक्यू अकादमी इस्लामी स्कूल की 19 वर्षीय छात्रा लाइबा अमजद ने सेंट एंटोनी हाई स्कूल के दौरे के दौरान कहा कि ” आज के समाज में कई बार मुसलमान यह सोचकर डरे रहते हैं कि लोग उनके बारे में गलत धारणा रखते हैं। ” दूसरी ओर गैर मुस्लिम लोग भी भयभीत रहते हैं। ” उन्हें एक मुसलमान को देखकर लगता है कि कहीं यह व्यक्ति कोई उग्रवादी तो नहीं ”।

पीईडब्ल्यू रिसर्च सेंटर की ओर से फरवरी में किए गए सर्वेक्षण से यह बात सामने आई है कि अगर कोई अमेरिकी व्यक्तिगत रूप से किसी मुसलमान को नहीं जानता है तो इस बात का अधिक संभावना है कि वह सभी मुसलमानों को आतंकवादी समझता है.

ग़ौरतलब है कि मुसलमान अमेरिकी आबादी का एक प्रतिशत हिस्सा हैं। इसी सर्वेक्षण में यह भी पाया गया है कि 60 प्रतिशत अमेरिकी, जो किसी मुसलमान को जानते हैं, उनका मानना है कि ये लोग उग्रवादियों का समर्थन नहीं करते लेकिन जो मुसलमानों को नहीं जानते उनमें से 48 प्रतिशत ऐसा समझते हैं। सेंट एंटोनी के वरिष्ठ छात्रों ने दौरे पर आए हुए मुस्लिम छात्रों के साथ लंच खाया। इसके बाद 17 वर्षीय क्रिस बेरन ने कहा कि आज से पहले मेरा कभी मुसलमानों से संपर्क नहीं हुआ था। मुसलमानों को आज के दौर में अतिवादी माना जाता है। मेरे विचार में इस समस्या का समाधान यही है कि इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

तस्वीर बदलने की कोशिश के तहत उत्तरी अमेरिका में इस्लामी स्कूल परिषद पाठ्यक्रम में बदलाव कर रही है। वह 24 अमेरिकी राज्यों में स्थापित अपने 78 सदस्य स्कूलों के बीच बैठकों की व्यवस्था करें। परिषद की डायरेक्टर सोफिया अजमत ने कहा कि इस देश के लोग मुसलमानों के बारे में जानना चाहते हैं वह जानता चाहते हैं कि इस्लामी स्कूलों के अंदर क्या होता है।

परिषद अपने शिक्षकों से मुस्लिम समुदाय के अंदर अधिक स्वयंसेवक परियोजना शुरू करने, स्थानीय सरकार की बैठक में भाग लेने और छात्रों का एक डाटाबेस बनाने का अनुरोध करेगी। यह सब ऐसे युग में किया जा रहा है जब मुसलमान बहुत परेशानी के दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिका और अन्य देशों में इस्लाम के नाम पर होने वाले उग्रवादियों के हमलों के कारण मुसलमानों को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है। उनकी कठोर परीक्षण किया जाता है.

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