Wednesday , September 26 2018

‘मुसलमानों में एकजुटता, मौजूदा वक्त की जरूरत’

32 वी हैदरी कॉन्फ्रेंस में खानकाहे हैदरिया हसनपुरा शरीफ के नायब सज्जादा नशीन डॉक्टर सैयद नाहीद अहमद ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों के दरमियान इत्तिहाद और इत्तिफाक़ की सख्त जरूरत है । और इस्लाम धर्म पूरी दुनिया में अपने अमन व शांति मोहब्बत के पैगाम की वजह से अहमियत की निगाह से देखा जाता है ।

लेकिन अफसोस है कि आज इस्लाम का कलिमा पढ़ने वाले लोग आपस में ही दस्त बगरीबां हैं। और इसकी वजह से मुसलमानों की अहमियत घटती जा रही है, और तरह-तरह के मसाइल इनके सामने खड़े किए जा रहे हैं । कभी तलाके़ सलासा के नाम पर और कभी लव जिहाद के नाम पर जुल्मो सितम का निशाना बनाया जा रहा है । और इस्लाम की अजमत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है ।

और मासूम बेगुनाह नौजवानों की जान ली जा रही है, जो निहायत चिंताजनक है । इसलिए शरीयत के उसूल पर हमें खुद सख्ती से अमल करने की ज़रूरत है, और पैग़ंबरे इस्लाम के पैगाममे अमन को लोगों तक पहुंचाने की ज़रूरत है ।

जब कि दिल्ली से आए हुए मौलाना मकबूल अहमद सालिक मिस्बाही ने कहा कि शरीयत में किसी तरह की सेंधमारी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी । शरीयत के उसूल पूरी दुनिया के लिए निहायत लाभदायक हैं । और इन उसूलों पर अमल करने से पूरे मुल्क में अमन शांति का वातावरण कायम हो सकता है ।

और साथ ही दीन की शिक्षा दीक्षा के साथ साइंस और टेक्नोलॉजी की उच्च शिक्षा की सख्त जरूरत है। जब तक हमारे बच्चे शिक्षित नही होंगे समाज में फैली बुराइयां ,खामियां दूर नहीं की जा सकती है । और हिंदुस्तान की तमामम खानकाहों को अपनी पुरानी रीत को बहाल करने की जरूरत है । जहां से दीन की शिक्षा दीक्षा के साथ साथ रूहानी तरबीयत भी हो सके। और दरपेश तमाम मसाइल के हल का यही एक बेहतरीन स्रोत है।

इस्लाम धर्म ने कभी भी समाज को तोड़ने की बात नहीं की बल्कि टूटे हुए दिलों को जोड़ने का काम किया है । और इसी पैगाम को लेकर हम समाज में जाएं ,और एक दूसरे के साथ अमन, शांति ,भाईचारगी और निहायत अकीदत व मोहब्बत से पेश आएं।

हैदरी कॉन्फ्रेंस का आयोजन चकिया बाजार समिति के मैदान में निहायत हर्षोल्लास के साथ किया गया। खानकाहे हैदरिया हसनपुरा शरीफ के सज्जादा नशीन पीर ए तरीकत हजरत अल्लामा अलहाज सैयद नबील अहमद हैदर उल कादरी की सरपरस्ती में कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।

इस मौके से मौलाना बशीरुद्दीन शास्त्री, मुफ्ती रज्जब अली बनारस, मुफ्ती याकूब अहमद मिस्बाही बनारस, मौलाना मम्नू उल हक हैदरी, मौलाना सय्यद आकिफ मियां हैदरी, मौलाना हाशिम रजा अशरफी कानपुर ने भी कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया और अमन व शांति का पैगाम दिया।

जबकि शायरे इस्लाम जनाब दिलकश रांचवी, जनाब शकील रहबर चैन पूरी, राहत विष्णुपुरी ,ताहिर नबीली ने नात शरीफ पेश किया।
इस मौके से मौलाना मुश्ताक अहमद बुरहानी, मौलाना हशमत रजा रहमानी, मौलाना सेराजुल हक अशरफी, समाज सेवी कौसर रजा, मास्टर तनवीर आलम हैदरी, वसील अहमद खान सम्मिलित हजारों लोग मौजूद थे।

अनीसुर्रहमान चिश्ती की रिपोर्ट (मोतिहारी, बिहार)

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