क्या मोदी के प्रति मुसलमानों की सोच बदली है?

क्या मोदी के प्रति मुसलमानों की सोच बदली है?

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र मोहम्मद वासिफ के अनुसार अमरोहा जनपद में उनके पैत्रिक गांव में लगभग 150 मुसलमानों ने भाजपा को लोकसभा में वोट दिया।

वासिफ बताते हैं, वैसे बीजेपी का उम्मीदवार हार गया और बसपा का सांसद जीत गया लेकिन अब गांव की छोटी मोटी बात के लिए यही 150 मुसलमान आगे आगे जा कर बीजेपी नेताओं से काम के लिए कहते हैं. किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है।

लोकनीति—सीएसडीएस पोस्ट पोल सर्वे 2019 के अनुसार लगभग 8 फीसदी मुसलमानों ने बीजेपी को वोट दिया और लगभग 15 फीसदी चाहते थे कि मोदी सरकार वापस आ जाये।

ये आंकड़े देखने में भले कम लगे लेकिन इनके पीछे 2014-2019 में मोदी का कार्यकाल है। अब अगर बदलाव हुए और कहीं 15 से 20 फीसदी मुसलमान भी बीजेपी की तरफ चले गए तो बाकी पार्टियों का वोट शेयर धराशायी हो जाएगा।

अगर हम उत्तर प्रदेश की बात करें तो गठबंधन (सपा-बसपा) को एकमुश्त मुसलमान वोट मिला और 15 सीटें भी जिसमें 6 मुसलमान जीते। अगर ये वोट हिले तो गठबंधन का टिकना मुश्किल हो सकता है. इस बात की फिक्र सभी पार्टियों को है।

डी डब्ल्यू हिन्दी पर छपी खबर के अनुसार, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मोहम्मद सज्जाद कहते हैं, “किसी भी सरकार का अपने नागरिकों को साथ लेकर चलने का इरादा अच्छी बात है।

वादे हुए हैं अब कितने अमल में आएंगे ये देखने वाली बात है। मुख्य बात ये है कि बीजेपी के मूल संघ परिवार में एंटी मुस्लिम आइडियोलॉजी घुली हुई है और कांग्रेस में ऐसा नहीं हैं। इस अंतर को भाजपा कैसे पाटेगी, ये देखने वाली बात होगी।

फिलहाल अब शहरों में बीजेपी और मोदी की होर्डिंग्स में मुसलमान चेहरे नजर आते हैं, खुल कर मुसलमान भाजपा में होने की बात कहते हैं. ये बदलाव नहीं तो क्या है कि पुराने लखनऊ के मुस्लिम मोहल्ले में ढोल पर मुस्लिम युवकों ने बीजेपी की जीत पर नाचते हुए बधाइयां दी थीं।

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