Monday , December 18 2017

केंद्र द्वारा शहीदों के बच्चों की पढ़ाई का फंड काटने पर नौसेना प्रमुख ने लिखा पत्र

दिल्ली: सरकार द्वारा जवानों के बच्चों को मिलने वाली शिक्षा प्रतिपूर्ति को कम करने के फैसले पर नौसेना प्रमुख सुनील लांबा ने रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखा है। जिसमे उनहोंने मोदी सरकार से गुजारिश किया है कि देश के लिए जान गंवाने वाले जवानों के बच्चों को मिलने वाली शिक्षा प्रतिपूर्ति को कम न की जाय, कृपया उस फैसले को वापस ले लिया जाए।

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नौसेना प्रमुख ने सरकार के उस फैसले की समीक्षा की मांग की है, जिसमें शहीदों या कार्रवाई के दौरान दिव्यांग हुए सैनिकों के बच्चों की शैक्षणिक सहायता राशि अधिकतम प्रतिमाह 10,000 रुपये तय की गई है।

सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि चेयरमैन ऑफ चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी) की हैसियत से एडमिरल लांबा ने रक्षा मंत्रालय को एक पत्र लिखा है। जिसमे उन्होंने इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। बता दें कि जुलाई में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद यह सीमा लगाई गई थी।

उधर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने पत्रकारों से कहा था कि सरकार हमेशा से सशस्त्र बलों का समर्थन करती रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिए थे कि वह इस मामले की समीक्षा कर सकती हैं।

उल्लेखनीय है कि 1972 में लाई गई इस योजना के तहत शहीदों या कार्रवाई के दौरान दिव्यांग हुए सैनिकों के बच्चों की स्कूलों, कॉलेजों और अन्य व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थानों की ट्यूशन फीस पूरी तरह माफ रहती है। लेकिन इसी वर्ष एक जुलाई को सरकार ने एक आदेश जारी करते हुए ट्यूशन फीस की अधिकतम सीमा 10,000 रुपये तय की गई थी। सरकार के इस फैसले को लेकर सैनिकों और पूर्व सैनिकों में काफी गुस्सा है।

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