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नजरिया- मुल्क के इस मुश्किल हालत में जातिवाद का जहर

मुल्क के हालात बहुत बद्तर नाजुक और कमजोर हो गये हैं। कोई किसी से मस्लक में उलझा है, कोई फिल्म रिलीज नहीं होने दे रहा है, कुछ लोग जात धर्म के नाम पर लोगों को डरा धमका रहे हैं मार रहे हैं, किसी को भी कानून का ग़लत उपयोग कर फंसाया जा रहा हैं,

एक दुसरे पर चप्पल फेंकने नाक काटने गला काटने पर इनाम की घोषणा कर रहा है जालिमों को पनाह और बेगुनाहों को सज़ा मिल रही हैं मुद्दे तो बहुत हैं लेकिन सभी बकवास है बस एक दुसरे को भला-बुरा नीचा दिखाकर खुशियां हासिल की जा रही हैं लेकिन फायदा कुछ भी नहीं बस वक्त और सलाहियत की बरबादी हों रहीं हैं दो अक्लमंद एक दुसरे को बेवकूफ बना रहे हैं।

दुनिया तरक्की कर रहीं हैं और लोगों को सामाजिक मुद्दों में उलझाया जा रहा हैं ताकि कोई तरक्की की बात ना कर पाए सब बेवकूफ होकर सभी को बेवकूफ बना रहे हैं। वक्त और सलाहियत बर्बाद कर रहे हैं जिससे देश की जनता को भ्रमित किया जा रहा हैं।

देश बर्बादी के कगार पर पहुंच चुका हैं और बेबुनियाद मामले अखबार, मीडिया की रौनक बढ़ा रहे हैं जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाया जा रहा हैं और बेबुनियाद मामलों में केंद्रित कर रहे हैं।

इसका नतीजा आनेवाली नस्लों को भुगतना होगा। चाहें राष्ट्र किसी भी मज़हब का हो मिला जुला हो उसकी रौनक ऊंचाइयां पहचान विकास पर निर्भर होती हैं इस दौर में लोग उन्हें ही महत्व देते हैं जो पैसों और विकास की ऊंचाइयों को छूते हैं मगर अफसोस होता हैं आज देश में बेबुनियाद मामलों को तुल दिया जा रहा हैं और सबसे बड़ी बात ये हैं कि सरकार भी इन मामलों में पुरी तरह शामिल हैं।

Joya Waseem

ये लेखक के निजी विचार हैं

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