Tuesday , April 24 2018

नज़रिया : बाबरी मस्जिद, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और मौलाना सलमान नदवी

हैदराबाद में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा आयोजित मीटिंग के पश्चात देश के समाचार पत्रों, न्यूज़ चैनलों और सोशल मिडिया पर कुछ लोगों का बोर्ड के खिलाफ झूठा प्रोपगंडा निरंतर जारी है। बोर्ड की मीटिंग में हुई चर्चा को बिना बोर्ड की अनुमति के सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है लेकिन अब ऐसा महसूस हो रहा है कि सही तस्वीर लोगों के सामने रखी जाये।

मौलाना सलमान नदवी ने एक टीवी चैनल को इंटरव्यू दिया है जो गुमराह करने वाला और झूठ का पुलिंदा है। उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। अपने इंटरव्यू में मौलाना ने कहा था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के दो-तीन सदस्य ही उनकी रविशंकर से मुलाकात और बाबरी मस्जिद को शिफ्ट करने के प्रस्ताव के खिलाफ थे जबकि ऐसा नहीं था।

पूर्व में एक बैठक के दौरान बाबरी मस्जिद का मामला उठा था और उसमें साफ़ कह दिया गया था मस्जिद वहीँ बनेगी और उसका स्थान नहीं बदला जायेगा। मस्जिद या उसकी जमीन साथ कुछ नहीं किया जा सकता है। इस प्रस्ताव पर सलमान नदवी ने भी दस्तखत किये थे और बैठक की मेजबानी उनके मदरसे ने की थी।

उस दौरान कुछ आपत्तियां सामने आईं थीं जिनका जवाब देने के लिए नदवी साब को कहा गया था लेकिन उन्होंने जवाब देने के बजाय मौलाना सज्जाद नौमानी पर कार्यवाही की मांग की जिन्होंने कुछ मौकों पर ऐसी तक़रीर और बयान दिए थे। बाद में मौलाना सलमान नदवी ने कहा कि हम्बली मसलक के तहत मस्जिद को शिफ्ट किया जा सकता है, लेकिन साथ ही कुछ शर्तें भी रखीं और अपनी बात पर कायम रहे।

फिर मौलाना के टीवी चैनल पर बयान आये जिसमें उन्होंने खुद को हिन्दू-मुस्लिम एकता का पैरोकार बताया जिसमें उन्होंने अपनी सारी हदें पार कर दी। जब बाबरी मस्जिद मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है और आप इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं जो गलत हैं।

(लेखक डाक्टर सैयद कासिम रसूल इलियास मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य हैं)

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