महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ 40 सीटों पर बात पक्की- एनसीपी

महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ 40 सीटों पर बात पक्की- एनसीपी

औरंगाबाद
नैशलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने 2019 के लिए विपक्ष की रणनीति में बदलाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि क्षेत्रीय पार्टियों का गठबंधन बीजेपी के विकल्प के रूप में सामने आएगा। हालांकि इस गठबंधन को कौन लीड करेगा, इसके जवाब में वह बार-बार यही दोहराते रहे कि यह लोकसभा चुनाव के बाद ही तय होगा। उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र की 40 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस के साथ एनसीपी की सहमति हो चुकी है।

गुरुवार को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में अपने दौरे के दौरान शरद पवार ने कहा कि वह पहले से ही सभी विपक्षी दलों को सतर्कता से चलने के साथ-साथ क्षेत्रीय ताकत और एक-दूसरे की शक्ति पर विचार करने के लिए फॉर्म्युला दे चुके हैं। वह कहते हैं, ‘उदाहरण के लिए डीएमके को तमिलनाडु में लीड करना चाहिए, कांग्रेस को कर्नाटक और गुजरात में, जबकि यूपी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को आगे आना चाहिए।’

’40 सीटों पर सहमति, अन्य 8 पर बातचीत जारी’
शरद पवार ने घोषणा कि उनकी पार्टी की कांग्रेस के साथ महाराष्ट्र में 40 लोकसभा सीटों पर सहमति हो चुकी है जबकि अन्य 8 पर बात चल रही है। उन्होंने कहा कि औरंगाबाद और पुणे सहित बची हुई सीटों के भाग्य का फैसला भी कुछ ही दिनों में हो जाएगा। उन्होंने इस दौरान कहा, ‘कांग्रेस के खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता औरंगाबाद और पुणे में टिकट मांग रहे हैं।’

एनसीपी मुखिया ने कहा कि यदि स्थानीय नेता सहमति तक पहुंचने में सफल नहीं हो पाते हैं तो वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से मिलकर 2 से 3 सीटों पर समस्या का निदान करेंगे। औरंगाबाद सीट से टिकट की आस लगाए बैठे एमएलसी सतीश चव्हाण के साथ मीडिया से मुखातिब होते हुए शरद पवार ने कहा कि कुछ पार्टी कार्यकर्ता उन्हें इस सीट पर दावा ठोंकने के लिए दबाव बना रहे हैं।

पुणे में दोनों दलों के बीच फंस सकता है पेच
उन्होंने कहा, ‘मैंने उन्हें कहा कि हमारे पास पुणे में 3 सीटें पहले से ही हैं लेकिन उन्होंने इस ओर इशारा किया कि कांग्रेस की उपस्थिति निकाय चुनाव और दूसरे क्षेत्रों और कम हुई है।’ हालांकि पवार ने स्पष्ट किया कि इस तरह की चीजें कांग्रेस के साथ गठबंधन में बाधा नहीं बनेगी।

वहीं सतीश चव्हाण का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि कांग्रेस इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए जोर नहीं देगी क्योंकि पिछले 4 लोकसभा चुनाव में वह यहां से हार चुकी है। मैं चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं।’ वहीं कांग्रेस ने हालांकि जोर दिया कि वह जिला परिषद, कई पंचायत समिति में अभी भी सत्ता में है।

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