NDTV के खिलाफ फैसले से सरकार की तानाशाही बेनक़ाब: मौलाना अरशद मदनी

NDTV के खिलाफ फैसले से सरकार की तानाशाही बेनक़ाब: मौलाना अरशद मदनी
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नई दिल्ली: जमीअत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने समाचार चैनल एनडीटीवी पर सरकार द्वारा एक दिन की पाबंदी आयद किए जाने की कड़ी निंदा करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन और लोकतंत्र पर हमला बताया है। मौलाना मदनी ने कहा कि निष्पक्ष, ईमानदार और संतुलित समाचार और रिपोर्ट पब्लिश करना एनडीटीवी की पहचान है.

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NDTV ने कई अवसरों पर देश के कमजोर वर्गों, अल्पसंख्यकों और दलितों के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की है और सरकार को आईना दिखाया है। हाल ही में जब कई समाचार चैनल भोपाल एनकाउंटर पर शिवराज चौहान सरकार की वाह वाह में व्यस्त थे तब एनडीटीवी ने बहुत साहस दिखाते हुए उस मुठभेड़ की खामियों और कमज़ोरयों को उजागर करते हुए स्पष्ट कर दिया था कि इस मुठभेड़ के संबंध में समाज के एक वर्ग की ओर से उठाए जा रहे सवाल गलत नहीं हैं और यह मुठभेड़ शक के दायरे में है।

न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार मौलाना मदनी ने कहा है कि हालांकि मोदी सरकार ने एनडीटीवी के खिलाफ यह फरमान पठानकोट आतंकवादी हमले की रिपोर्टिंग के संबंध में जारी किया है लेकिन देश के बुद्धिजिवी वर्ग इस बात को अच्छी तरह समझ रहा है कि इस कार्रवाई के पीछे सरकार की मंशा क्या है और कैसे वह अपने खिलाफ उठने वाली हर एक आवाज की शक्ति को दबा देना चाहती है. मौलाना मदनी ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और अगर देश का मीडिया कमजोर हुआ तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक होगा और देश में तानाशाही को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि अफसोस की बात है कि जो लोग देश में आपातकाल लगाने के लिए 40 साल बीत जाने के बावजूद इंदिरा गांधी को निशाना बनाने से नहीं चौकते अब खुद भी उसी राह पर चल पड़े हैं। मोदी सरकार का यह फैसला निश्चित रूप से देश को आपातकाल की ओर ले जाने वाला है। ऐसे समय में जब देश के ज्यादातर मीडिया सरकार की हां में हां मिलाने पिछड़ों व अल्पसंख्यकों खास कर मुसलमानों और दलितों की आवाज को दबाकर सरकार की मंशा को पूरा करने में लगे हुए हैं, वहीं मज़लूमों और अल्पसंख्यकों के अधिकार के लिए आवाज उठाने वाले टीवी चैनल एनडीटीवी पर प्रतिबंध भले ही वह एक दिन के लिए ही हो, चिंता का विषय है। ऐसे में देश के लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए सरकार के उस फैसले की जितनी भी निंदा की जाए कम है।

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