Thursday , December 14 2017

NEET परीक्षा से उर्दू को हटाने के खिलाफ मुस्लिम छात्र संगठन SIO जाएगा सुप्रीम कोर्ट

प्रतीकात्मक तस्वीर

मुंबई: राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (एनईईटी-यूजी) में उर्दू को शामिल नहीं किए जाने को लेकर एक मुस्लिम छात्र संगठन ने विरोध दर्ज किया। स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया ने कहा कि सरकार का यह फैसला असंवैधानिक और उर्दू माध्यम के छात्रों के साथ भेदभाव करने वाला कदम है।

एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया के वरिष्ठ असोसिएट मोहम्मद अली शेख ने कहा कि हम एनईईटी-यूजी 2017 के सिलेब्स से उर्दू को भारत सरकार द्वारा हटाने के अन्यायपूर्ण कदम का पुरजोर विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेगी।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के सरकारी और निजी कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस, बीएचएमएस जैसे मेडिकल की परिक्षाओं के पाठ्यक्रमों उर्दू को बाहर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से 20,000 से अधिक उर्दू माध्यम से पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य अधर में  अधर में चला गया है।

उन्होंने कहा कि अब इन छात्रों को किसी ऐसे अपरिचित पाठ्यक्रमों को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसमें भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान जैसे विषय नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि जब ओडि़या और कन्नड़ जैसे भाषा को एनईईटी में जगह मिल सकती है तो उर्दू को क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि उर्दू को जान-बूझकर क्यों निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से अल्पसंख्यक समुदाय के लिए उच्च शिक्षा के अवसर और भी कम हो जाएंगे।

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