बलात्कार के आरोपी को मौलवी बताकर कर मदरसों को बदनाम करने की साजिश नाकाम

बलात्कार के आरोपी को मौलवी बताकर कर मदरसों को बदनाम करने की साजिश नाकाम
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कुछ दिनों से देश के प्रमुख अखबारों और समचार चेनलो ओर फर्जी न्यूज़ पोर्टल्स ने नीचता की हदों को लांगकर बेशर्मी के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर झंडे गाड़ दिये हैं। ऐसा ही एक मामला दिल्ली से सामने आया जहां नीचता की सारी हदों को पार कर एक बलात्कार के आरोपी को मौलवी बताकर मदरसों को बदनाम करने की कोशिश गई है।

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मामला यह है कि राजधानी दिल्ली के नरेला थाने में स्थित बवाना जेजे कॉलोनी इलाके में 9 साल की एक मासूस के साथ बलात्कार हुआ है। बलात्कार का आरोप 70 साल के एक बुज़ुर्ग पर लगा है। जिनपर आरोप है कि बीते शनिवार को बुजुर्ग व्यक्ति ने मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया है। बताया जा रहा है कि उस बुजुर्ग व्यक्ति के पास आसपास के झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले छोटे बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं।

बच्ची के साथ हुई हैवानियत की खबर सुनकर बुधवार को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने अस्पताल पहुंचकर बच्ची का हाल चाल मालूम किया और मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिस की।

उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर सीधे सीधे मदरसों को टारगेट करते हुए आरोपी व्यक्ति को मदरसा संचालक घोषित कर दिया। इसके अलावा देश के प्रमुख समाचार पत्रों के न्यूज पॉर्टल्स ने बिना तहक़ीक़ किये आरोपी को मदरसे से जोड़कर धर्म विशेष की भावनाओं से खिलवाड़ किया है, और मदरसों को बदनाम करने की कोशिश की। जबकि पुलिस के अनुसार यह मामला कुछ और ही है।

बता दें कि इस मामले को लेकर पुलिस ने आरोपी का मदरसा संचालक होने से किया साफ इंकार किया है। वहीँ स्थानीय लोगो ने भी मौलवी या हाफिज होने से इनकार किया है।

वौइस् के खबर के मुताबिक, नरेला थाने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कथित आरोपी (जिन्हें मौलवी बताया गया) जहां बच्चों को पढ़ाता था। वह एक झुग्गीनुमा आवास है ना कि कोई मदरसा है। अधिकारी का कहना है कि व्यक्ति वहां आसपास के रहने वाले गरीब बच्चों को धार्मिक तालीम देता है।

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