क्या न्यू इंडिया में मुस्लिमों के खिलाफ़ नफ़रत और हिंसा बढ़ती जा रही है?

क्या न्यू इंडिया में मुस्लिमों के खिलाफ़ नफ़रत और हिंसा बढ़ती जा रही है?

किसी ज़माने में अंहिसा के लिए दुनिया भर में पहचान बनाने वाले आज के नए भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत बढ़ रही है, जिसके कारण आए दिन हिंसक हिंदू भीड़ किसी निर्दोष मुसलमान की बुरी तरह से मार मारकर हत्या कर देती है।

पिछले कुछ समय से भारत का झारखंड राज्य मॉब लिंचिग या हिंसक हिंदू भीड़ द्वारा मुस्लिम युवाओं की हत्या का गढ़ बनता जा रहा है। झारखंड में धार्मिक नफ़रत का सबसे ताज़ा शिकार 24 वर्षीय तबरेज़ अंसारी हुए हैं, जिन्हें भीड़ ने घंटों तक एक खंबे से बांधकर लाठी डंडो से बुरी तरह से पीटा और जय श्री-राम का नारा लगाने पर मजबूर किया।

इस अमानवीय घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें बुरी तरह से घायल अंसारी को हिंदुओं के एक समहू द्वारा मारते हुए और जय श्री-राम का नारा लगाने के लिए मजबूर करते हुए देखा जा सकता है।

पार्स टुडे डॉट कॉम के अनुसार, भीड़ द्वारा बुरी तरह से मारने और पुलिस की लापरवाही के कारण अंसारी की मौत हो गई, जिसके बाद विश्व स्तर पर इस अमानवीय अपराध की विश्व स्तर पर निंदा हुई और भारत के 50 से भी अधिक शहरों समेत दुनिया के कई देशों में इसके ख़िलाफ़ प्रदर्शनों का आयोजन किया गया।

देश विदेश में हुए प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों ने मोदी सरकार से मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं पर निंयत्रण करने की मांग की और मुसलमानों के प्रति हिंदुत्ववादी संगठनों के दुष्प्रचार की निंदा की।

इस जन आक्रोश के बाद भारतीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में अंसारी की हत्या पर टिप्पणी करते हुए कहा, मुझे इस घटना पर दुख है, अपराधियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए, लेकिन झारखंड को लिंचिंग का गढ़ कहना उचित नहीं है।

ग़ौरतलब है कि मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के पहले चरण 2014-2019 तक गोरक्षा के नाम पर मुसलमानों और दलितों को क्रूर हिंसा का निशाना बनाया गया, जिसके कारण सैकड़ों मुसलमानों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। मोदी सरकार के दूसरे चरण में जो मई 2019 से शुरू हुआ है मुसलमानों से ज़बरदस्ती जय श्री-राम का नारा लगवाने के नाम पर हिंसा का तांडव मचाया जा रहा है।

झारखंड में अंसारी की निर्मम हत्या के साथ ही कोलकाता, मुंबई और दिल्ली में मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा की रिपोर्टें दर्ज की गईं।

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में एक मुस्लिम ड्राइवर को जय श्री-राम का नारा लगाने पर मजबूर किया गया। मुंबई में भी इसी तरह की एक घटना में टैक्सी ड्राइवर फ़ैसल उस्मान को मार पीटकर जय श्री-राम का नारा लगाने पर मजबूर किया गया।

कोलकाता में भी मदरसे के एक अध्यापक शाहरुख़ हैदर को दो अन्य मुसलमानों के साथ धार्मिक नफ़रत का सामना करना पड़ा, जहां शहर के केन्द्र में एक लोकल ट्रेन में उन्हें बुरी तरह से मारा पीटा गया।

इन तीनों ही घटनाओं में पीड़ितों को जय श्री-राम का नारा लगाने के लिए मजबूर किया गया। भारत में नफ़रत पर आधारित अपराधों के आंकड़ों पर नज़र रखने वाली फ़ैक्ट-चैकर.इन वेबसाइट के आंकड़ों के मुताबिक़, इस साल की शुरूआत से अब तक दर्जनों मुसलमानों को हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं ने धार्मिक नफ़रत का निशाना बनाया है।

पिछले साल, भारत की सर्वोच्च अदालत ने भीड़ द्वारा हिंसा को घिनौनी हरकत क़रार देते हुए मोदी सरकार से बढ़ती लिंचिंग से निपटने के लिए नया क़ानून बनाने के लिए कहा था।

भारत में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ समेत अन्य हिंदुत्ववादी संगठनों की कार्यशैली पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि 2014 में केन्द्र में मोदी सरकार के गठन के बाद से भीड़ द्वारा हिंसा की जितनी भी घटनाएं हुई हैं।

उनमें से अधिकांश में पीड़ितों को मारते वक़्त वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करने में समानता पाई जाती है। इससे यह साफ़ ज़ाहिर है कि वे इस तरह की घटनाओं पर पर्दा नहीं डालना चाहते हैं, बल्कि इस तरह से अपना संदेश हर भारतीय तक पहुंचाना चाहते हैं, जिससे मुसलमानों में भय और हिंदुओं में गर्व की भावना जगे।

अभी तक मुसलमानों ने इस तरह की हिंसक घटनाओं पर क़ानून के दायरे में रहते हुए तार्किक रूप से अपना विरोध दर्ज कराया है और उनका कहना है कि हमारे इस धैर्य को कमज़ोरी नहीं समझा जाए।

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