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बेक़सूर होने के बावजूद 10 साल जेल में रहे ‘उमर’ से कनाडा सरकार ने मांगी माफ़ी, हर्जाना भी दिया

10 साल तक ग्वांतानामो जेल में क़ैद रह चुके बेकसूर उमर ख़ज़र से कनाडा सरकार ने माफी मांगी है। कनाडा सरकार ने माना है कि उनसे मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है, लिहाज़ा ख़ज़र को 81 लाख डॉलर का हर्जाना भी अदा किया गया है।

सरकार और ख़ज़र के वकीलों ने पिछले महीने कनाडा सर्वोच्च न्यायालय के 2010 के आदेश के आधार पर इस बात पर सहमति बनाई थी कि कनाडाई अधिकारियों ने ग्वांतानामो में ख़ज़र के अधिकारों का उल्लंघन किया। सरकार ने ख़ज़र से माफी मांगने का एक बयान जारी किया।

इस बयान में कहा गया है, “कनाडा की सरकार की ओर से हम माफी मांगना चाहते हैं ख़ज़र से, उन्हें विदेश में हुई कठिनाइयों के लिए जिनमें कनाडाई अधिकारियों की कोई भी भूमिका रही हो और उन्हें जो भी नुकसान पहुंचा हो।”

कनाडा में जन्मे ख़ज़र उस समय केवल 15 साल के थे जब उन्हें अमरीकी सेना द्वारा अफ़ग़ानिस्तान में पकड़ लिया गया था। ख़ज़र को इसके बाद ग्वांतानामो ले जया गया और उन पर एक सैन्य आयोग द्वारा युद्ध अपराधों का आरोप लगाया गया।

गौरतलब है कि मौरिटनियन नागरिक मोहमेदोऊ ओउल्द स्लाही ने हिरासत केंद्र में गुज़ारे अपने दिनों के बारे में लिखा है। हालाँकि अब उन्हें रिहा कर दिया गया है।

इसमें उन्होंने जनवरी 2015 में प्रकाशित दा ग्वांतानामो बे डायरी में विवादास्पद अमेरिकी सैन्य जेल में कैदियों द्वारा झेले जाने वाले अपमान और दुराचार के मामलों का ज़िक्र किया है।

अपने संस्मरण में, स्लाही ने बाँधकर रखे जाने, आंखों पर पट्टी, लंबी अवधि तक खड़ा रखने, नंगा किया जाने, पानी से इनकार किया जाने और सोने न देने, असहनीय शोर और हिंसा की धमकियों के बारे में वर्णन किया है।

एक जगह उन्होंने महिला पूछताछकर्ताओं द्वारा यौन शोषण का वर्णन किया है। दूसरी जगह उन्होंने लिखा है कि उन्हें बाहर समुद्र में ले जाया गया था, तब तक खारा पानी पीने के लिए मजबूर कर किया गया जब तक उन्होंने उल्टी न कर दी और उसके बाद चेहरे और पसलियों में पीटा गया और खरोचों और पिटाई के निशान छिपाने के लिए बर्फ में डुबोया गया।

स्लाही ने लिखा है कि 2004 में अत्याचार बर्दाश्त सीमा से बाहर हो जाने के बाद वह अपने जांचकर्ताओं को खुश रखने के लिए झूठे बयान देने लगे।

स्लाही को 2001 में 9/11 के हमलों के बाद मॉरिटानिया में अमेरिकी बलों द्वारा गिरफ्तार किया गया था | उन पर 1991 और 1992 में अफगानिस्तान में कम्युनिस्ट नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ अल कायदा की लड़ाई में शामिल होने के लिए अफगानिस्तान की यात्रा करने का आरोप लगाया गया था।

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