“मुसलमान आतंकवादी नहीं होता, अगर होता तो मेरे हाथ में कलम नहीं हथियार होता”

“मुसलमान आतंकवादी नहीं होता, अगर होता तो मेरे हाथ में कलम नहीं हथियार होता”
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औरंगाबाद:  मुंबई लोकल ट्रेन धमाकों में अदालत से बाइज्जत बरी होने वाले मुंबई के अब्दुल वाहिद शेख ने कहा कि मुसलमान आतंकवादी नहीं होता अगर होता तो मेरे हाथ में कलम नहीं हथियार होता। गौर तलब है कि अब्दुल वाहिद शेख ने नौ साल कैद की सजा सहन करने के बाद बा इज्ज़त बरी हुए थे.

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औरंगाबाद में 25 मिल्ली सामाजिक और कल्याणकारी संगठनों की फेडरेशन मुस्लिम प्रतिनिधि परिषद के बैनर तले राज्य में ” आतंकवाद और मुस्लिम युवक” के शीर्षक से एक सेमिनार आयोजित किया गया। इस सेमिनार में अब्दुल वाहिद शेख ने अपनी किताब “बेगुनाह क़ैदी की दास्ताने अलम” जारी किया. जिसके बाद उन्होंने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि ‘मुसलमान आतंवादी नहीं होता, अगर होता तो मेरे हाथ में हत्यार होता क़लम नहीं’

सेमिनार से पूर्व डीआईजी महाराष्ट्र एसएम मुशर्रफ और तहलका डॉट काम से जुड़े रहे वरिष्ठ पत्रकार अजीत साही ने भी संबोधित किया। सेमिनार में देश के मौजूदा हालात पर भी रौशनी डाली गई।

औरंगाबाद के मौलाना आजाद रिसर्च सेंटर में अग्रणी क़ानूनदां और पूर्व डीआईजी एसएम मुशर्रफ और अजीत साही को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। इस अवसर पर एसएम मुशर्रफ ने जांच एजेंसियों के तरीक़े और उनकी खामियों पर खुलासा किया। उन्होंने महाराष्ट्र में सभी विध्वंसक कारियों का ब्यौरा पेश किया और उनमें कैसे बेकुसूर नौजवानों को फंसाया गया उसका खुलसा किया। एसएम मुशर्रफ ने अदालतों में होने वाले पक्षपातपूर्ण फैसलों के खिलाफ आवाज उठाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि अगर इस के खिलाफ कमर कस नहीं हुए, तो देश में अराजकता फैल जाएगी।

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