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पहलु खान के हत्यारों को बाहर कर देने को लेकर वायरल हो रहा ये खुला पत्र

राजस्थान पुलिस के सीआईडी-सीबी द्वारा
पहलु खान के नामजद हत्यारों को जाँच के दायरे से
बाहर कर देने को लेकर 
कारवाँ-ए-मोहब्बत के जयपुर में स्वागत के मौके पर
जयपुर के जन संगठनों का विरोध एवं निंदा पत्र।
दिनांक  15.9.2017
श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया,
मुख्यमंत्री,
राजस्थान सरकार, 
जयपुर।
विषय  एफ.आई.आर. नं. 255/2017 पुलिस थाना बहरोड़ में सभी नामजद मुल्जीमों को जांच से बाहर निकालने के विरोध में। 
महोदया ,
राजस्थान पुलिस के सीआईडी-सीबी द्वारा गौपालक किसान पहलु खान की निर्मम हत्या के मामले के नामजद आरोपियों हुकुम चन्द,जगमाल, ओमप्रकाश, सुधीर, राहुल सैनी तथा नवीन सैनी को जाँच के दायरे से बाहर करके दिखा दिया है कि राजस्थान सरकार और राजस्थान पुलिस गौरक्षकों की गुंडागर्दी की हिमायती है। उसे कानून की अनुपालना की कोई फिक्र नहीं है। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि पहलु खान की हत्या की जाँच जो कि पुलिस महानिरीक्षक हेमंत प्रियदर्शी की निगरानी में पुलिस उपाधीक्षक, कोटपुतली से बदल कर सीआईडी-सीबी को सौंपी ही इसलिये गई ताकि हत्यारोपियों को बचाया जा सके।
पहलु खान के मसले में आपकी सरकार बहुत संवेदनहीन रही है। आपकी सरकार के गृहमंत्री गुलाब चन्द कटारिया पहले ही इस निष्कर्ष पर पंहुच गये थे कि पहलु खान गौपालक नहीं बल्कि गौतस्कर था और उन्होंने गौरक्षकों द्वारा किये गए हत्या जैसे जघन्य कृत्य की निंदा करने के बजाय गौगुन्डों की प्रशन्सा करते हुए कहा कि-“गौरक्षकों ने बहुत ही अच्छा काम किया, लेकिन उनकों कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए था।” ऐसे में निष्पक्ष जाँच कैसे संभव है ?
अंततः वही हुआ, हत्या के नामजद आरोपी आज जाँच से बाहर  किये जा चुके है और पशुपालक एवं दुग्ध विक्रेता पहलु खान व उनके बेटे इर्शाद व आरिफ, अजमत खान और रफीक खान तथा उनके साथियों के खिलाफ लगाये गए गौतस्करी के फर्जी केस (252/2017, 253/2017 पुलिस थाना बहरोड) की जाँच जारी है। पहलु खान एवं उनके बेटों के पास गायों की खरीद फरोख्त के सारे अधिकृत दस्तावेज होने के बावजूद, सारे तथ्य दिए जाने के बाद भी केस अभी भी चल रहा है यह जवाबी कार्यवाही पूरी तरह से बदले की भावना से की जा रही है।
स्पष्ट है कि राजस्थान पुलिस की जाँच निहायत ही पक्षपातपूर्ण है, जिनकी हत्या हुई, जिन्हें बुरी तरह से मारा गया, जिनके खरीदे हुए पशु छीन लिये गये, उनके खिलाफ जाँच चल रही है, मगर हत्या के आरोपी बचाये जा रहे है, 6 नामजद लोग जाँच के दायरे से बाहर कर दिए गए है, जिन 9 लोगों के खिलाफ चालान पेश किया गया, वह इतने कमजोर तथ्यों पर आधारित था कि अधिकांश को जमानत मिल चुकी है।
जयपुर के जन संगठनों का मानना है कि राजस्थान सरकार की कोई भी मंशा नहीं है कि गौरक्षा के नाम पर नफरत फैलाने, खुलेआम गुंडागर्दी करने और लोगों की हत्या तक कर देने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही की जाये। अगर समय रहते कड़ी कार्यवाही की जाती तो वर्ष 2015 से गाय के नाम पर भीड़ द्वारा की जा रही हत्याओं पर लगाम लगाई जा सकती थी, मगर ऐसा नहीं हो पाया है।
राजस्थान में गौहिंसा के मामलों को देखें तो नागौर जिले के डीडवाना इलाके के अब्दुल गफूर कुरैशी को 30 मई 2015 को मार डाला गया, उनके हत्यारे खुलेआम घूम रहे है, कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
जयपुर में स्थित होटल रब्बानी पर 19 मार्च 2017 को बिना कोई सबूत या शिकायत के गौमांस खिलाने का आरोप लगा कर राष्ट्रीय महिला गौरक्षा दल की स्वयम्भू अध्यक्ष साध्वी कमल दीदी ने हमला बोला, नगर निगम जयपुर के मेयर अशोक लाहौटी ने कमल दीदी की इस गुंडागर्दी को सहयोग दिया और जबरन गैरकानूनी तरीके से होटल को सीज करवा दिया, बाद में एफएसएल की रिपोर्ट से पता चला कि वह गौमांस नहीं हो कर मुर्गे का मांस था। कोर्ट ने मेयर लाहौटी की होटल सीज करने की कार्यवाही को भी बदल दिया, अंततः कानूनी दखल से होटल रब्बानी चालू हो पाया, मगर साध्वी कमल दीदी खुलेआम घूम रही है।
16 जून 2017 को प्रतापगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन की साजिश से नगरपालिका के कर्मचारियों ने जफर खान की पीट पीट कर हत्या कर दी, इस हत्या को 90 दिन हो जाने के बाद भी आज तक एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, इस मामले में भी गृहमंत्री कटारिया ने आरोपियों को पहले हि क्लीनचिट दे दी थी।
9 सितम्बर 2017 की रात सीकर जिले के पाटन थाना क्षेत्र के कोला की नांगल गाँव के 58 वर्षीय आदिवासी भगता राम मीना को गाय के नाम पर पीट पीट कर मार डाला गया, हत्या के 13 घंटे बाद मुकदमा दर्ज हुआ, मगर कोई पुख्ता कार्यवाही अब तक नहीं की गई। ऐसे अनेक उदहारण है जहाँ पर गाय के नाम पर मुसलमानों, घुमन्तु बंजारों, आदिवासियों और दलितों पर हमले किये गये है, इन सभी मामलों में यह पेटर्न साफ तौर पर देखा गया कि सरकार की पूरी मशीनरी ने जुल्म के आरोपी गौगुन्डों को बचाया है और अब पूरी निर्ल्ल्जता से पहलु खान के हत्यारों को बचाया जा रहा है।
जयपुर के जन संगठनों की ओर से राज्य सरकार और राजस्थान पुलिस की इस प्रकार की पक्षपातपूर्ण कार्यवाही की कड़े शब्दों में निंदा की जाती है। पीयूसीएल पीडि़तों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा तथा पहलु खान के बेटों अजमत और रफीक को सभी प्रकार की कानूनी मदद प्रदान करेगा ताकि वे राज्य पुलिस द्वारा हत्यारोपियों को जाँच के दायरे से बाहर करने के निर्णय को कोर्ट में चुनौती दे सकें।
महोदया ,यह अत्यंत हैरानी की बात है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस तरह भीड़ द्वारा पीट पीट कर मार डालने की घटनाओं की रोकथाम हेतु राज्य सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कानून की अनुपालना के सख्त निर्देश दिए गए है, बावजूद इसके भी आपकी सरकार शायद यह तय कर चुकी है कि वह नफरत और हिंसा फैलाने वाले संगठनों और मुस्लिम विरोधी समूहों कर खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करेगी।
अपने 27 जुलाई 2017 को टाईम्स अॉफ इण्डिया में मॉब लिंचिंग पर लिखे अपने लेख में कहा कि -“ केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार भीड़ द्वारा पीट पीट कर मार डाले जाने को समर्थन नहीं करती है, क्योंकि भाजपा का राष्ट्रवाद और देशभक्ति में विश्वास करती है, जो कभी असहिष्णु नहीं हो सकती है“ ऐसा कहते हुए अपने लिखा कि भीड़ की हिंसा बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, जिससे आपका हृदय छलनी हो जाता है, आप इन्हें रोकने के लिए जिंदगी लगा देने की भी बात करती है, मगर जिस तरह से आपकी सरकार, आपके गृहमंत्री और आपकी पुलिस अपनी भूमिका निभा रही है, उससे लगता है कि भीड़ द्वारा पीटे जाने और जान ले लिए जाने की घटनाओं को आप शायद ही कभी अपनी इस जिन्दगी में रोक पायेगी, क्योंकि ना तो आपकी ऐसी मंशा है और ना ही रोकने की राजनितिक इच्छाशक्ति। अगर आप वाकई मॉब लिंचिंग जैसे जघन्य कृत्य को दिल से रोकना चाहती है तो पहलु खान और जफर खान की हत्या के मामले में कड़ी कार्यवाही करके यह स्पष्ट सन्देश दीजिये कि आप मॉब लिंचिंग को बर्दाश्त नहीं करेगी। उम्मीद है कि आप सिर्फ लेखों के जरिये घडियाली सियासती आंसू नहीं बहायेगी और प्रदेश भर में दशहत का पर्याय बन चुके गौगुन्डों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने के दिशा निर्देश देगी।
हमारी मांग है कि – एफ.आई.आर. 255/2017 के नामजद अपराधियों को तुरन्त गिरफ्तार किया ना कि जांच से बाहर किया जाये। साथ ही एफ.आई.आर. नं. 252/2017 व  253/2017 को बन्द किया जाये।
हम है
राजस्थान के सभी अमन पसंद नागरिक एवं संगठन
भँवर मेघवंशी, कविता श्रीवास्तव, सवाई सिंह, निखिल डे, कोमल श्रीवास्तव, प्रेमकृष्ण शर्मा, भँवर लाल कुमावत-पप्पू, नेसार अहमद, हरकेश बुगालिया, नरेन्द्र शर्मा, मुकेश निर्वासित, मो. हसन, सुमित्रा चैपडा, संजय माधव, निशा सिद्धू, निशात हुसैन, तारा चन्द वर्मा, सुमन देवठिया, रेणुका पामेचा, लाड़ कुमारी जैन, पी.एल. मीमरोठ, महेन्द्र चैधरी, मंजू लता, तारा अहलुवालिया, इंदिरा पंचैली, विजय लक्ष्मी जोशी, कुसुम साईवाल, राशिद हुसैन, डाॅ. इकबाल, कपिल सिंह सांखला, बंसत हरियाणा, नारायण बारेठ, ममता जैटली, पारस बंजारा, अनन्त भटनागर, ब्रजमोहन, श्याम लाल, अ’िवनी पालीवाल, डी.एल. त्रिपाठी, राधे’याम शुक्लावास, कैलाश मीणा, रावता राम, गोपाल वर्मा, बाबु लाल व अन्य साथी।
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