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UP: गोश्त की अफ़वाह के बाद मुसलमानों के घरों में घुसी पुलिस, महिलाओं को घसीटते लाई थाने

भैंस का मांस बेचने की खबर पर पुलिस ने मुस्लिमों के घरों में प्रवेश किया और महिलाओं का अपमान करते हुए तोड़-फोड़ की। घटना उत्तर प्रदेश के बलरामपुर की है जो उर्दू दैनिक राष्ट्रीय सहारा में प्रकाशित हुई है। पुलिस को शहर में बिक्री के लिए लाये गए मीट को लेकर सूचना मिली थी कि एक स्कॉर्पियो वैन में इसको ले जाया जा रहा है।

पुलिस ने वैन पर हमला करने की एक योजना और एक नाले के पास इंतजार करने लगे। जब उन्होंने वैन को देखा और रोकने की कोशिश की लेकिन वैन चालक भाग गया और बलरामपुर नर्सिंग होम के पास मोहल्ला यतीम खाना के पास वैन को छोड़ दिया। पुलिस ने वैन की खिड़कियों को तोड़ दिया और मांस से भरे तीन बोरे पकड़े। मांस को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया लिया और क्रेन से वैन को पुलिस स्टेशन लाये।

बाद में पुलिस की टीम पहले मोहल्ला यतीमखाना गई और मुबीन शाह के घर पर छापा मारा। उन्हें घर में कोई भी ऐसी वस्तु नहीं मिली, लेकिन पुलिस पूरी टीम ने बिना किसी महिला पुलिस अधिकारी के मुबीन के दो बेटों और उनकी बहू को जबरदस्ती ले गए। मोहल्ला गाढ़वावा पुलिस कन्नू को भी पुलिस थाने में ले गई। पुलिस ने उनके घरों को तोड़ दिया और सामानों को नुक्सान पहुंचाया।

दूसरे मोहल्ले अलीजान पुरा में दिलवाड़ के घर पर छापे मारे जहां ज़किुरुनिस्सा दरवाजे के पास बर्तन धो रहा थी। जब पुलिस ने अचानक दरवाजे को खोला तो उसको चोट आई। पुलिस ने जानबूझकर घर के सामान को नष्ट कर दिया और ज़किुरुनिस्सा को खींचकर पुलिस थाने में ले गई। इस दौरान भी कोई महिला पुलिस अधिकारी उनके साथ नहीं थी।

उनके पड़ोस से 90 वर्षीय इब्राहिम को पुलिस स्टेशन खींचकर ले गए और उसे लात मारी। दो मुस्लिम युवकों राजू और बबलू को भी पुलिस थाने में ले गई और वे इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक पुलिस हिरासत में थे। अखबार के मुताबिक पुलिस ने वैन पर कब्जा कर लिया था और उसका चालक फरार हो गया था तो सवाल यह है कि क्यों मुसलमानों के घरों पर छापा मारा गया और बुजुर्ग आदमी, युवकों और महिलाओं को हिरासत में लिया गया? इसका कोई मतलब नही बनता है।

अखबार के अनुसार पुलिस रिश्वत लेकर भैंस का मीट की बिक्री करने की अनुमति दे रही थी और इसी वजह से कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। इन घटनाओं ने मुसलमानों में भय का वातावरण बना हुआ है। अखबार ने सीओ सिटी को उद्दृत करते हुए लिखा है कि वह स्वयं इस घटना से पूरी तरह अवगत नहीं थे। कई लोग गिरफ्तार किए गए हैं। हमें पता होना चाहिए कि कौन दोषी है और कौन निर्दोष है और जो निर्दोष हैं, उन्हें रिहा किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पता नहीं था कि किस जानवर का मांस था। जो भी हो पुलिस द्वारा महिलाओं की गिरफ्तारी और उन्हें अपमानित करना गलत है। पुलिस ने ऐसा एक विशेष समुदाय के सदस्यों को खुश करने और प्रोत्साहित करने के लिए किया है। एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास का नारा लगा रही है, वहीँ मुसलमानों को बिना कारण निशाना बना रही है और यह घटना एक उदाहरण है।

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