निकाह हलाला और बहुविवाह की याचिका मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लिए नई मुसीबत!

निकाह हलाला और बहुविवाह की याचिका मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लिए नई मुसीबत!
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A queue of Bahraini woman wearing Abaya robes with the Niqad covering their faces. REUTERS/Chris Helgren

नई दिल्ली। पेशे से वकील एवं भारतीय जनता पार्टी के नेता अश्विनी उपाध्याय ने एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिदअत) को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद निकाह हलाला और बहुविवाह को असंवैधानिक करार दिए जाने की मांग को लेकर एक याचिका उच्चतम न्यायालय में दायर की गई है जो मु स्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लिए नई मुसीबत होगी।

इस याचिका में कहा गया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) ऐप्लिकेशन ऐक्ट 1937 की धारा-दो को असंवैधानिक घोषित किया जाए, जिसके तहत बहु विवाह और निकाह हलाला को मान्यता मिलती है। उपाध्याय ने मामले में विधि एवं न्याय मंत्रालय तथा विधि आयोग को प्रतिवादी बनाया है।

याचिकाकर्ता की दलील है कि निकाह हलाला और बहुविवाह संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार), 15 (कानून के सामने लिंग आदि के आधार पर समानता का अधिकार) और अनुच्छेद-21 (जीवन के अधिकार) का उल्लंघन करता है। ऐसी एक अन्य याचिका शमीना बेगम नाम की एक मुस्लिम महिला ने हाल ही सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है।

तीन बच्चों की मां शमीना दो बार तीन तलाक का दंश झेल चुकी हैं। पूर्व में शीर्ष अदालत ने एक फैसले में तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करते हुए कहा था कि यह धर्म का अभिन्न अंग नहीं है। न्यायालय के समक्ष एक बार में तीन तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला तीनों मुद्दे थे, लेकिन केवल तीन तलाक को ही असंवैधानिक घोषित किया गया था और बाकी मुद्दों पर बाद में विचार करने की बात कही थी।

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