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सेना की रिपोर्ट में ख़ुलासा, हथियार तस्करी का दोषी हैं कर्नल पुरोहित

सप्रीम कोर्ट के आदेश पर मालेगांव धमाके के आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित को बीते सप्ताह ज़मानत मिल गई। ज़मानत मिलने के फौरन बाद पुरोहित सेना की वर्दी दोबारा पहनने की तैयारी कर रहे थे कि तभी मिलिट्री इंटेलीजेंस एक रिपोर्ट उनकी राह में अड़चन बन गई।

27 जुलाई 2011 की डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ मिलिट्री इंटेलीजेंस (डीजीएमआई) की एक रिपोर्ट में सेना के अनुशासन का पालन न करने के मामले में कर्नल पुरोहित को दोषी करार दिया गया है। रिपोर्ट में उनके कट्टरवादी हिंदू संगठनों और मालेगांव धमाके से कनेक्शन का भी जिक्र किया गया है। साथ ही हथियारों की तस्करी और गैर कानूनी से रूप से हथियारों को बेचने का भी जिक्र है।

रिपोर्ट के शुरुआती हिस्से में कहा गया है, ‘पैसों के फायदे के लिए पुरोहित सेना के हथियार खरीदने और निपटान में शामिल थे। उन्होंने पुणे के हथियार डीलर से हथियारों की डील की थी। जिसके बाद उन्होंने राकेश धावडे (मालेगांव धमाके में आरोपी) से बातचीत शुरू की।

डीजीएमआई की रिपोर्ट के मुताबिक पुरोहित ने आर्मी यूनिट की 9 एमएम की एक पिस्तौल धावडे को पचास हजार रुपए में बेची थी। ये पिस्तौल एक आरएसएस लीडर आलोक की हत्या के लिए दी गई। जांच के दौरान पुरोहित ने इस बात को स्वीकार  भी किया है।

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