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गाय के नाम पर फैले आतंक के बीच मोदी सरकार ने बीफ़ बिज़नेस बढ़ाने के लिए ख़र्च किए 67 करोड़

नई दिल्ली: केंद्र में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही देश का माहौल ऐसा हो चुका है कि किसी के पास बीफ होने या उसके बीफ खाने के शक के आधार पर ही उसकी हत्या कर दी जाती है।
इसी कड़ी में अब तक अखलाक, पहलू खान, जुनैद या असगर अंसारी, ये सभी बीफ के अफवाह में भीड़ का शिकार बन चुके हैं।

ये एजेंडा देश में बीजेपी की सरकार और हिंदूवादी संगठनों द्वारा चलाया जा रहा है।  लेकिन बीजेपी की असलियत से बीजेपी भक्त शायद अभी वाकिफ नहीं है।
खबर के मुताबिक, एक आरटीआई के तहत इस बात का खुलासा हुआ है कि कैसे गौरक्षा का दावा करने वाली मोदी सरकार ने अपने 3 सालों में बू़चड़खानों को करोड़ों रुपए का अनुदान दिया है।

ये आरटीआई दरभंगा के रहने वाले जेडीयू नेता इकबाल अंसारी ने। 17 मई 2017 को फाइल की थी।
जिसमें उन्होंने ये जानकारी मांगी थी कि क्या देश में पशुओं का वध करने की मशीनों पर सब्सिडी का कोई प्रावधान है?

इस आरटीआई के जवाब में फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज मंत्रालय ने लिखित जवाब में बताया है कि पशु वधशाला बनाने और उसके आधुनिकरण के लिए स्कीम चलाई जा रही है। जिसके चलते मोदी सरकार अनुदान और सहायता के रूप में अधीनस्थ स्थानीय निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, सहकारिताओं और बोर्ड को अधिकतम 15 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाता रहा है।

 

इतना ही नहीं मंत्रालय ने यह भी बताया कि 2014 से 2017 के बीच में मोदी सरकार ने लगभग 68 करोड़ रुपए बीफ व्यापार को बढ़ावा देने के लिए राज्यों को अनुदान के रूप में दिए।

 

 

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