शेखुल हदीस मौलाना असलम क़ासमी का इंतकाल, नमाज-ए-जनाजा में हजारों लोग शामिल हुए

शेखुल हदीस मौलाना असलम क़ासमी का इंतकाल,  नमाज-ए-जनाजा में हजारों लोग शामिल हुए
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उतर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद स्थित दारुल उलूम वक्फ के उस्ताद-ए-हदीस मौलाना असलम कासमी का लंबी बीमारी के बाद सोमवार को इंतकाल हो गया। वह 80 वर्ष के थे।

सूत्रों ने बताया कि मौलाना असलम कासमी पिछले पांच वर्षों से रीढ़ की हड्डी और सांस की बीमारी से परेशान थे। सोमवार की दोपहर उनका इंतकाल हो गया। कासमी ने दारुल उलूम से शिक्षा प्राप्त की जिसके बाद वह वहीं पर नौकरी करने लगे। उन्हें नाजिम-ए-बरकियात बनाया गया। वर्ष 1982 के बाद वह दारुल उलूम वक्फ में चले गए, जहां वह उस्ताद-ए-हदीस बनाए गए। वे कई भाषाओ के ज्ञाता थे।

रात करीब 8 बजे दारुल उलूम की आहत-ए-मोलसरी में उनकी नमाज-ए-जनाजा हुई जिसके उपरांत उन्हें कासमी कब्रिस्तान में सुपूर्द-ए-खाक कर दिया गया।

 

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