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पैगम्बर मुहम्मद (PBUH) ने फरमाया- इस्लाम में जायज़ कामों में सबसे खराब काम है तलाक

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पैगम्बर मोहम्मद ने तलाक को खुदा की नजर में जायज चीजों में से सबसे नापंसद किया जाने वाला कदम घोषित किया था क्योंकि इससे पारिवारिक जीवन की बुनियाद शादी टूट जाती है.

बहुमत का फैसला देने वाले न्यायाधीशों में से एक न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन ने कहा कि तलाक से सिर्फ एक महिला और पुरूष के बीच शादी नहीं टूटती है, बल्कि इससे बच्चों पर गंभीर मनौवैज्ञानिक दबाव भी पड़ता है.

पैगंबरों ने भी तलाक को गलत माना था, क्योंकि इससे परिवार का विघटन होता है. जस्टिस आरएफ नरीमन ने कहा कि तलाक न केवल विवाह को तोड़ता है बल्कि इससे मानसिक व अन्य कई तरह की व्याधियां पैदा होती हैं जो इस रिश्ते से जन्मे बच्चों पर गलत असर डालती हैं.

जस्टिस नरीमन का कहना है कि इस्लाम में विवाह को एक समझौता माना जाता है. अन्य समझौतों की तरह से यह भी विशेष परिस्थितियों में तोड़ा जा सकता है. पैगंबर मोहम्मद साहब के समय से पहले अरब में इस बात की आजादी थी कि छोटी सी बात पर पत्नी को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए.

जब इस्लाम बना तो उसमें तलाक को उस स्थिति में मान्यता दी गई जिसमें पत्नी के गलत चरित्र की वजह से वैवाहिक संबंध निभाना असंभव हो जाए. लेकिन ऐसे ज्यादातर मामलों में व्यक्ति तलाक के लिए सही कारण को बता ही नहीं पाता है.

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