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औरत चाहे कितनी भी बूढ़ी क्यों न हो जाए, बगैर महरम के हजयात्रा नाजायज़: मुफ़्ती-ए- हरम

औरंगाबाद: हरमे मक्की के मुफ़्ती प्रोफेसर डॉ वसीउल्लाह अब्बास ने महरम के बगैर औरतों के हजयात्रा को नाजायज़ क़रार दिया है। उनका कहना है कि औरत चाहे कितनी ही बूढी क्यों न हो जाए, हजयात्रा के लिए महरम साथ होना जरूरी है।

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खबर के मुताबिक हरम के मुफ़्ती जमीअत अलअरबिया अलहिंद की निमन्त्रण पर औरंगाबाद के दौरे पर हैं। उसने मीडिया से बातचीत करते हुए यह कहा किसऊदी सरकर ने महरम के बगैर हजयात्रा की इजाजत नहीं दी है। गौरतलब है कि भारत सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की ओर से पिछले दिनों हज पालिसी में बदलाव करते हुए ऐलान किया गया था कि 45 साल से ज्यादा की उम्र की औरतें चार के ग्रुप में बगैर किसी महरम के हज पर जा सकती हैं। इस मामले में केन्द्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने खुलासा किया था कि अन्य देशों की महिलाएं भी इस तरह हज कर रही हैं और सऊदी सरकार ने खुद इस की पहल की है।

जब भारत के आलिमों ने इसे गैर-शरइ बताया तो उन्हें औरतों की आज़ादी और तरक्की का विरोधी बतलाया गया। लेकिन अब मुफ्ती हरम के बयान से यह मामला उलझ गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा सरकार मुफ्ती हरम के बयान पर कैसी प्रतिक्रिया देती है।

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