जानें कौन थे पत्रकार जमाल खशोगी? हत्या के पहले दी गई यातना!

जानें कौन थे पत्रकार जमाल खशोगी? हत्या के पहले दी गई यातना!
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वॉशिंगटन.

कुछ हफ्तो पहले लापता हो चुके अमेरिकी पत्रकार जमाल खशोगी के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है. मामले में बुरी तरह फंसे सऊदी अरब ने खुद इसकी पुष्टि की है.

न्यूज एजेंसी एएफपी ने खबर दी कि शुक्रवार को सऊदी अरब ने ये आखिरकार स्वीकार कर लिया कि जमाल खशोगी की मौत तुर्की की राजधानी इंस्तांबुल में स्थित सऊदी अरब के दूतावास में मारे गए हैं।

जमाल खशोगी की मौत की खबर की पुष्टि हो जाने के बाद वाइट हाउस ने इस घटना पर दुख जताया है. वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी सारा सांडर्स ने ट्वीट कर कहा कि ‘हम जमाल खशोगी की मौत की खबर सुनकर दुखी हैं. हम उनके परिवार और उनके करीबियों को सांत्वना देते हैं. हम सऊदी अरब की इस घटना की जांच में साथ हैं. हम लगातार इस अंतरराष्ट्रीय जांच की निगरानी करेंगे और सुनिश्चित करेंगे एक पारदर्शी और जल्दी न्याय हो। ‘

कौन हैं जमाल खाशोगी
जमाल सऊदी में लंबे वक्त से पत्रकारिता कर रहे हैं। सुन्नी रियासत के खिलाफ लिखने को लेकर वह हमेशा विवादों में रहे हैं। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को सत्ता मिलने के बाद वह खुद निर्वासन लेकर अमेरिका चले गए थे। फिलहाल वह वॉशिंगटन पोस्ट के लिए लिख रहे थे। 1987 और 1995 में वह आतंकी ओसामा बिन लादेन के साथ घूमने और उनके इंटरव्यू लेने के बाद चर्चा में आए थे। सऊदी अरब के एलीट ग्रुप से भी उनके रिश्ते अच्छे हैं।

मंगेतर इंतजार करती रही, नहीं आए जमाल
हाल में 60 वर्ष की उम्र पूरी करनेवाले जमाल हाल में दो बार सऊदी के वाणिज्य दूतावास पहुंचे थे। दूसरी बार जब वह गए तो वहां से कथित रूप से वापस ही नहीं लौटे। जमाल को अपनी तुर्की मंगेतर से शादी करने थी। इसके लिए उन्हें कुछ कागजातों की जरूरत थी, उन्हें लेने वह 28 सितंबर को तुर्की में स्थित सऊदी दूतावास गए। उस दिन उन्हें 2 अक्टूबर को फिर से आकर कागजात एकत्र करने को कहा गया।

बातचीत के बाद जमाल वहां से चले गए और 2 को फिर पहुंचे। उन्होंने अपने फोन और पर्स मंगेतर को दे दिए थे और उनसे बाहर इंतजार करने को कहा था। मंगेतर के मुताबिक, फिर वह बाहर खड़ी इंतजार ही करती रहीं, लेकिन जमाल नहीं लौटे।

तुर्की के निशाने पर सऊदी
सऊदी और तुर्की के बीच इस बात को लेकर बहस जारी है कि जमाल कहां से लापता हुए। तुर्की का कहना है कि जमाल दूतावास से बाहर ही नहीं निकले, वहीं सऊदी कहता है कि पत्रकार इस्तांबुल में कहीं लापता हुए। तुर्की अधिकारियों का आरोप है कि सऊदी ने दूतावास में ही जमाल को मार दिया है। उन्होंने अपने पास कुछ विडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का दावा भी किया है।

अमेरिका, यूरोपीय देश सऊदी के खिलाफ
ट्रंप सरकार को अबतक सऊदी अरब के सहयोगी के तौर पर देखा गया है। लेकिन मामले के उछलने के बाद ट्रंप ने साफ कहा कि अगर पत्रकार को लापता करने में सऊदी का कोई हाथ हुआ तो उन्हें सजा के लिए तैयार रहना होगा। दूसरी तरफ यूरोप के बड़े अर्थतंत्र ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी का रवैया भी कुछ-कुछ अमेरिका ऐसा ही है। सभी ने मिलकर 22 से रियाद में शुरू हो रहे फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशटिव नाम के बड़े निवेश सम्मेलन का बहिष्कार किया है।

 

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