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क्या ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ के तहत कर्नाटक के चुनाव देरी से होंगे!

बेंगलूरू। क्या कर्नाटक देश का पहला राज्य बन जायेगा जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राज्य और संसदीय चुनावों को एक साथ करने की योजना सफल हो जाएंगी? उच्च स्तरीय सूत्रों ने डेक्कन क्रॉनिकल को बताया कि कर्नाटक राज्य के विधानसभा चुनाव छह महीने तक के लिए स्थगित किए जा सकते हैं और राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों के साथ आयोजित हो सकते हैं, जो इस वर्ष के अंत में निर्धारित हैं।

बीते कुछ समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की योजना पर सहमति बनाने की दिशा में काम कर रही है। नाम नहीं छापने का अनुरोध करते हुए सूत्र ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र से एक पत्र प्राप्त किया है, जिसमें राज्य सरकार को छह महीने के लिए विधानसभा चुनावों को स्थगित करने और नवंबर में अन्य राज्यों के साथ रखने के प्रस्ताव पर विचार करने को कहा गया है।

केंद्र ने कथित तौर पर कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार को प्रस्ताव दिया है कि मुख्यमंत्री सिद्दरामैया इस समय तक केयरटेकर के रूप में मुख्यमंत्री रह सकते हैं। हालाँकि राज्य सरकार के उच्च स्तर के अधिकारियों ने ऐसा पत्र प्राप्त करने की पुष्टि करने से इनकार किया है। तथ्य यह है कि चुनाव मई में होने के बावजूद चुनाव आयोग से चुनाव तिथि के बारे में कोई पुष्टि नहीं है। यह उस दिशा में एक संकेत भी है।

एक सूत्र ने कहा कि भाजपा कर्नाटक में होने वाले चुनाव के लिए एक मजबूत स्थिति बनाने के लिए समय चाहती है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में अपने सभी मुख्यमंत्रियों द्वारा प्रस्तावित ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ योजना को आकार देने के लिए बुलाई गई बैठक के बाद यह रिपोर्ट जारी की गई। इस बीच, कानून के जानकारों ने कहा कि कर्नाटक में विधानसभा चुनाव स्थगित करने की संभावना बहुत कम है।

पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एन. भट्ट ने महसूस किया कि संभव है जबकि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील मोहन कटारकी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में चुनावों को स्थगित करने के लिए यह लगभग असंभव है। एक वरिष्ठ नौकरशाह ने महसूस किया कि चुनाव कराने की तैयारी के चलते केंद्र अभी ऐसा निर्णय नहीं लेगा।

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