Sunday , December 17 2017

बदमाशों को सबक सिखा रही “पाकिस्तान गर्ल”

इन दिनों पाकिस्तान में “पाकिस्तान गर्ल” कॉमिक सीरीज की प्रमुख किरदार सारा की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है. यह एक आम लड़की की कहानी है जो अपनी पालतू बिल्ली के साथ एक गांव में रहती थी. गांव में अचानक विस्फोट होता है जिसके बाद वह कोमा में चली जाती है. लेकिन जब वह कोमा से वापस आती है तो उसे एहसास होता है कि उसके पास अलौकिक शक्तियां है जिसका इस्तेमाल वह पाकिस्तान में महिलाओं की सुरक्षा के लिए करती है. सारा पाकिस्तान में महिलाओं की बेहतरी के लिए काम कर रही है.

पाकिस्तान के झंडे में मौजूद हरे रंग की पोशाक पहने सारा कभी एक औरत को पीट रहे आदमी पर निशाना साधती है तो वहीं कभी रिश्वत मांगने वाले पुलिस अधिकारी से लड़की को बचाती है. सारा के यही कारनामे दिन पर दिन खूब लोकप्रिय हो रहे हैं.

अंग्रेजी की इस कॉमिक सीरीज के रचयिता हसन सिद्दिकी को भरोसा है कि सुपर हीरो के तौर पर उभरता यह महिला चरित्र पाकिस्तान में लड़कियों का रोल मॉडल साबित होगा. साथ ही देश की लड़कियों को भ्रष्टाचार, अपराध और हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित करेगा. सिद्दिकी कहते हैं “महिला रोल मॉडलों की भारी कमी है लेकिन सुपर हीरो यहां की मुख्यधारा में काफी लोकप्रिय हैं. इसलिये हमारी कोशिश थी कि एक मजबूत महिला किरदार तैयार करें जो देश की लड़कियों को और पूरे महिला तबके को प्रेरणा दे सके और साथ ही देश के नौजवान लड़कों में भी जोश भर सके.”

पाकिस्तान में महिलाओं की सामाजिक स्थिति कोई खास अच्छी नहीं है और आज यहां महिलायें अपने हक की मांग कर रहीं है.

सारा के इस किरदार को सोशल मीडिया पर भी खूब तवज्जो मिल रही है. पाठक इसे पसंद कर रहे हैं और फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया साइटों पर सकारात्मक प्रक्रिया दे रहे हैं. लोग सिद्दिकी के इस कदम की भी खूब तारीफ कर रहे हैं.

सिद्दिकी कहते हैं कि अब वह इस कॉमिक सीरीज को उर्दू में लाने पर विचार कर रहे हैं. उनका मकसद लाखों पाठकों तक पहुंचना है. साथ ही सिद्दिकी इसे ऐनिमेशन फॉर्म में उतारने की संभावनायें भी तलाश रहे हैं. लेकिन सिद्दिकी के लिये लाखों लोगों तक अपनी कॉमिक सीरीज को पहुंचाना आसान नहीं है. इस समस्या का एक बड़ा कारण पाकिस्तान की खस्ता हाल शिक्षा व्यवस्था है. निरक्षरता का आलम यह है कि देश में करीब आठ साल की उम्र वाले आधे से अधिक बच्चे पढ़ने में अक्षम हैं.

साल 2016 के सरकारी आंकड़ों को मुताबिक, देश के तकरीन 2.4 करोड़ बच्चे स्कूलों से बाहर हैं. इनमें भी लड़कियां अधिक हैं जो घरों में रहती हैं. इस कॉमिक सीरीज को शिक्षकों का खूब समर्थन मिल रहा है. सारा की फैन और एक स्कूल प्रिंसिपल सादिया अदनान कहती हैं, “ऐसी कोशिशें बच्चों को पढ़ाने में मददगार साबित होगी और साथ ही इससे उनके दिमाग में लिंगभेद जैसे मसलों की बेहतर समझ बनेगी.”

सिद्दिकी की यह कॉमिक बुक उनकी पिछली कॉमिक सीरीज “पाकिस्तान मैन” की तरह खूब लोकप्रिय हो रही है. पाकिस्तान गर्ल की ही तरह 2013 में  एक अन्य कॉमिक सीरीज “द बुर्का एवेंजर” ने भी देश में खूब वाहवाही बटोरी थी.

 साभार: www.dw.com

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