‘पंडित जी’ पैगंबर मोहम्मद (सल्ल.) की शान में करते हैं शेरो-शायरी

‘पंडित जी’ पैगंबर मोहम्मद (सल्ल.) की शान में करते हैं शेरो-शायरी
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मुंबई। ऐसे समय में जब नमाज पढ़ने और जिन्ना की तस्वीर को लेकर हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोगों में मतभेदों की खबरें आती रहती हैं, दूसरी तरफ एक शख्स ऐसा भी है, जो खुद ‘पंडित’ होकर इस्लाम के प्रवर्तक मोहम्मद साहब की शान में कसीदे पढ़ रहा है। मुंबई में रहने वाले पंडित राम सागर उर्फ पृथ्वीपाल त्रिपाठी ने मोहम्मद साहब की प्रशंसा में अपनी शायरियों का कलेक्शन लिख डाला है।

68 वर्षीय सागर उस परिवार से संबंध रखते हैं, जो अयोध्या के एक ट्रस्ट राम लला विनय से जुड़ा है। वह विश्व ब्राह्मण परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। वह मुशायरों में एक चर्चित चेहरा बन चुके हैं, अपने ‘नतिया कलाम’ और अल्लाह की शान में शेर पढ़ने वाले सागर के घर में दर्जनों अवॉर्ड रखे हुए हैं। उनके घर में कुरान हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं में मौजूद है। गीता और रामायण को भी वह बराबर महत्व देते हैं।

उनकी कविताओं में ना सिर्फ मोहम्मद साहब की तारीफें होती हैं बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द्र को बढ़ाने वाली तकरीरें भी होती हैं। उर्दू और देवनागरी में लिखे गए उनकी पंक्तियां गंगा-जमुनी तहजीब को और मजबूत करती हैं। वह एक ऐसा माहौल बनाते हैं, जहां राम-रहीम और हिंदू-मुस्लिम एक-दूसरे के साथ रहते हैं।

यूपी के सुलतानपुर मे जन्मे सागर कहते हैं, ‘मोहम्मद साहब सिर्फ इस्लाम से नहीं जुड़े हैं। वह मानवता के लिए हैं और मैं उनका आशीर्वाद लेता हूं, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। वह किसी एक कौम के नहीं हैं।’ वह बताते हैं कि उनकी रोजी-रोटी प्रॉपर्टी के बिजनस से चलती है। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन करने वाले सागर को मशहूर शायर फिराक गोरखपुरी का भी सरंक्षण प्राप्त हो चुका है। इनके दादा चाहते थे कि सागर आईएएस अधिकारी बनें लेकिन कविता के प्रति प्यार के चलते उन्होंने कभी यूपीएससी की परीक्षा ही नहीं दी।

वह कहते हैं, ‘मैंने बहुत पैसा कमाया लेकिन मेरे अंदर जो कमी रह जाती थी, उसे कविता ने पूरा किया।’ सागर अपनी किताबों से होने वाली कमाई को मुस्लिम बच्चों की शिक्षा के लिए दान दे देते हैं। वह राम मंदिर बारे में क्या राय रखते हैं, इस सवाल के जवाब में सागर कहते हैं, ‘क्योंकि मामला कोर्ट में है इसलिए मैं ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहूंगा लेकिन अगर लोग इसमें राजनीति ना होने दें तो यह समस्या सुलझ सकती है।’

(साभार : नवभारत टाइम्स)

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