Tuesday , December 12 2017

पैराडाइज पेपर मामले में भाजपा की मुश्किल बढ़ी, मंत्री जयंत सिन्हा ने दी सफाई

नयी दिल्लीः कर से बचने के लिए कर पनाहगाह वाले देशों से संबंधित लीक हुए पैराडाइज दस्तावेजों में केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा का नाम आने पर उन्होंने कहा कि किसी भी निजी उद्देश्य से कोई लेन-देन नहीं किया गया. उनका कहना है कि जो दस्तावेज मिले हैं, वो उस वक्त के हैं, जब वे मंत्री नहीं थे। मंत्री बनने के पहले ही उन्होंने कंपनी से इस्तीफा दे दिया था।

पैराडाइज दस्तावेजों की जांच पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, सिन्हा भारत में ओमिदयार नेटवर्क के प्रबंध निदेशक रहे हैं और ओमिदयार नेटवर्क ने अमेरिकी कंपनी डी लाइट डिजाइन में निवेश किया था. डी लाइट डिजाइन की केमैन द्वीप में अनुषंगी कंपनी है. सिन्हा ने सोमवार को ट्वीटों की एक सीरीज में कहा कि लेन-देन वैध और प्रमाणिक हैं.

नागर विमानन राज्य मंत्री सिन्हा ने कहा कि मेरी जिम्मेदार भूमिका में यह लेन-देन दुनिया के प्रतिष्ठित संगठनों की ओर से किये गये और यह कार्य ओमिदयार नेटवर्क में सहयोगी और इसकी ओर से डी लाइट डिजाइन के निदेशक मंडल में नामित प्रतिनिधि के तौर पर किये गये. उन्होंने कहा कि यह गौर करने की बात है कि यह लेन-देन डी लाइट डिजाइन के लिए ओमिदयार के प्रतिनिधि के तौर पर किये गये, न कि किसी निजी उद्देश्य के लिए.

गौरतलब है कि साल 2014 में झारखंड के हजारीबाग से लोकसभा सांसद बनने और नरेंद्र मोदी कैबिनेट में केद्रीय राज्य मंत्री बनने से पहले जयंत सिन्हा ओमिडयार नेटवर्क में मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर काम करते थे. ओमिडयार नेटवर्क ने अमेरिकी कंपनी डी डॉट लाइट डिजाइन में निवेश कर रखा था. डी डॉट लाइट डिजाइन की एक शाखा केमैन आइलैंड में भी स्थित थी. विदेशी कानूनी सलाह देने वाली कंपनी एप्पलबी के दस्तावेज के अनुसार, जयंत सिन्हा ने डी डॉट लाइट डिजाइन के डायरेक्टर के तौर पर भी सेवाएं दी थीं, लेकिन अपने चुनावी हलफनामे में उन्होंने इसकी कोई जानकारी नहीं दी थी. जयंत सिन्हा ने न तो चुनाव आयोग को और न ही लोक सभा सचिवालय और न तो प्रधानमंत्री कार्यालय को इसकी जानकारी दी थी.

‘पैराडाइज पेपर्स’ में बीजेपी के राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा का नाम भी सामने आया है। ऐसे में भाजपा की मुश्किलें बढ़ने वाली है। 8 नवंबर को सरकार नोटबंदी की सालगिरह मनाने जा रही है। विपक्ष इस दिन को ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाएगी। ऐसे में साफ है कि विपक्ष ‘पैराडाइज पेपर्स’ भुनाना चाहेगा।

एप्पलबी के दस्तावेज के अनुसार, इस कर्ज के लिए 31 दिसंबर 2012 को समझौता हुआ था. जब ये फैसले लिए गये, तो जयंत सिन्हा डी डॉट लाइट डिजाइन के डायरेक्टर थे.

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