माता-पिता अपने बच्चों के लिए क्रेडिट कार्ड बनने को तैयार होते हैं, बच्चों को कब अक्ल आएगी वो कम से कम आधार कार्ड तो बने !

माता-पिता अपने बच्चों के लिए क्रेडिट कार्ड बनने को तैयार होते हैं, बच्चों को कब अक्ल आएगी वो कम से कम आधार कार्ड तो बने !
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रांची : रजनीकान्त नाम के एक व्यक्ति कि उम्र 45 साल हो चुके थे। एक दिन उनकी पत्नी चल बसी कुछ दिन बाद जगदीश जी के रिश्तेदार और दोस्त फिर से घर बसा लेने कि बात कही, लेकिन रजनीकान्त जी नहीं माने, उन्होने कहा मेरे पास मेरी पत्नी का दिया हुआ सबसे बेहतरीन तोहफा है मेरे पास, मेरा बेटा उसे सफल बना पाऊँ मेरा जीवन अपने आप सफल हो जाएगा।

रजनीकान्त जी ने उसे अच्छे से पाल-पोस कर बड़ा किया, बड़ा हुआ तो उसे धूम-धाम से शादी भी किया अपना सफल बिजनेस अपने बेटे के नाम किया और रिटाइर्ड हो लिए। एक साल हुआ होगा इस बात को और एक सुबह रजनीकान्त जी सुबह-सुबह नाश्ता करने बैठे थे। उन्होने अपने बहू से कहा बेटा ये पराठे थोड़ा रूखे-सूखे लग रहे हैं, थोड़ा दही मिलेगा क्या एक कटोरी भर, अगर है तो, बहू ने साफ कह दिया पिताजी दही तो बिल्कुल नहीं है।

अब जब बहू ने ऐसा कहा तो रजनीकान्त जी का बेटा नाश्ता के लिए टेबल कि तरफ आ ही रहा था कि ये बातें उसने सुन ली। रजनीकान्त जी नाश्ता करने के बाद टेबल से उठ गए उसके बाद बेटा और बहू नाश्ता के लिए बैठे।

तब बहू ने ढकन से एक कटोरी दही निकाली और पति के प्लेट में रख दिया। बेटा तो उस वक़्त कुछ नहीं कहा लेकिन उसके दिमाग में एक कटोरी दही वाली बात चलती रही। रजनीकान्त जी का बेटा नाश्ते के बाद ऑफिस गया लेकिन उसके दिमाग में वो एक कटोरी वाली बात घर कर गया।

दूसरे दिन उसने अपने पिता से कहा पिताजी चलिये हमें पंडित जी के पास जाना है आपकी शादी की बात करके आया हूँ आपकी दूसरी शादी के लिए। पिताजी हंस कर बोले बेटा अब इस उम्र में शादी का क्या करूंगा। तब नहीं किया अब क्यों? मैं तुम्हें सारा प्यार देता हूँ फिर तुम्हें माँ कि अब क्या जरूरत है। तुम्हें दूसरी माँ तो नहीं चाहिए, तो फिर, बेटा ने कहा पिताजी मैं अपने लिए दूसरी माँ लाने या आपके लिए दूसरी पत्नी लाने के लिए ये नहीं कर रहा हूँ।

ये मैं इस लिए कर रहा हूँ कि आपके लिए अपने हिस्से का एक कटोरी दही रोज और बराबर मिलता रहे। मैं और आपकी बहू अब एक किराये के घर में रहने जा रहा हैं और मैं आपके ही ऑफिस में काम करूंगा पर एक कर्मचारी के तौर पर, पगार मिलेगी मुझे ताकि मेरी पत्नी को एक कटोरी दही की कीमत का पता चले।

मतलब, माता-पिता अपने बच्चों के लिए क्रेडिट कार्ड बनने को तैयार होते हैं बच्चों को कब अक्ल आएगी के वो माता-पिता के लिए आधार कार्ड तो बने। पहला प्यार तो कभी भुलाया नहीं जा सकता, फिर माता-पिता को लोग कैसे भूल जाते हैं।

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