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कर्नाटक में एक लड़के की मौत को दिया गया सांप्रदायिक रंग, पुलिस ने दी चेतावनी

कर्नाटक  में चौकाने वाला मामला सामने आया है. बता दें की कुछ दिन पहले परेश मेस्ता नाम के शख्स की लाश झील में मिली थी . पुलिस के मुकदमा दर्ज करने से पहले ही उसे हत्या करार दे दिया गया था .सोशल मीडिया पर बताया गया की उसकी हत्या  धारदार हथियार से की गई , उसका  गला काट दिया गया है, और उसे एसिड डालकर जला दिया गया है. सोशल मीडिया पर इसकी फोटो खूब वायरल हुई. वहां से निकलकर ऐसी फोटो मेन स्ट्रीम मीडिया में भी आ गईं. फोटो आने के बाद खूब हो हल्ला मचाया गया .

इसके हत्या पीछे  मुसलमानों का हाथ बता दिया गया . हिंदुओं का खून खौलाने की बातें कही जाने लगीं. सोशल मीडिया के जरिए सब कुछ बता दिया गया. हत्या है, कैसे हुई, क्यों हुई, किसने की वगैरह-वगैरह. ये सारी बातें तब की हैं, जब सिर्फ लाश मिली ही थी. पुलिस अभी उसका पोस्टमॉर्टम भी नहीं करवा पाई थी कि सब कुछ साबित कर दिया गया. किसी पुलिस की, मेडिकल की, कोर्ट की, किसी की जरूरत नहीं समझी गई. फैसला हो गया कि हिंदू की हत्या हुई है, मुस्लिमों ने की है और अब हिंदुओं का खून खौलना चाहिए.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

फिर क्या था  कर्नाटक में लोग इकट्ठा हो गए, सभाएं कीं और माहौल तनावपूर्ण हो गया. 12 दिसंबर को बड़ी रैली बुलाई गई थी. विधानसभा घेरने की तैयारी थी, लेकिन उससे पहले ही पुलिस की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आ गई. इस रिपोर्ट में उन सारी थ्योरीज को खारिज कर दिया गया. मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया कि जो भी कहा जा रहा है, सब गलत है. आटोप्सी रिपोर्ट के मुताबिक परेश के शव के साथ दरिंदगी नहीं हुई है. फोरेंसिक एक्सपर्ट और कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर शंकर एम बकनवार के मुताबिक शरीर पर किसी तरह के धारदार हथियार से हमला नहीं हुआ है. पुलिस ने गलतबयानी के लिए 43 साल के एक स्कूल टीचर को भी 11 दिसंबर को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि वो व्हाट्सएप के जरिए परेश मेस्ता की हत्या के मामले में गलत सूचनाएं वायरल कर रहा था. हत्या की मूल वजह जानने के लिए विसरा सुरक्षित रखा गया है. उसकी जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है. डॉक्टर का लेटर आप खुद देख लीजिए.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कर्नाटक के जिला  उत्तरी कन्नड़ में  पिछले 10 दिनों में  सांप्रदायिक हिंसा की कई घटनाएं देखी गई . इसकी शुरुआत 1 दिसंबर से हुई थी, जब कुछ लोग मोहम्मद साहब की एक अस्थाई समाधि बनाने की कोशिश कर रहे थे और दूसरा पक्ष इसका विरोध कर रहा था. थोड़ा हंगामा हुआ, एक दूसरे का विरोध हुआ और स्थिति शांत होने लगी कि 6 दिसंबर की शाम को एक बाइक और ऑटो रिक्शा की टक्कर हो गई. दोनों के समुदाय अलग-अलग थे, जिसके बाद छोटे से हादसे ने सांप्रदायिक रूप ले लिया. दोनों ही पक्षों के लोग आमने सामने आ गए. पुलिस भी पहुंची और उसने एक पक्ष के 28 और दूसरे पक्ष के 14 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इसी हंगामे के दौरान एक पक्ष का एक शख्स परेश मेस्ता गायब हो गया. 8 दिसंबर को शनि मंदिर के पास शेट्टी झील में उसकी लाश मिली.

इसके बाद फिर से सांप्रदायिक ताने-बाने के इर्द-गिर्द राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया. उडूपी चिकमंगलूर की सांसद शोभा करांडलजे ने कहा कि ये जिहादियों का काम है. ये भी सामने आया कि झील में फेंकने से पहले परेश मेस्ता पर धारदार हथियारों से हमला किया गया, उसके कई बॉडी पार्ट्स काट दिए गए और फिर एसिड या किसी केमिकल से उसका चेहरा जला दिया गया. मरने के बाद उसे झील में फेंक दिया गया.

परेश की हत्या में पुलिस में एक मुकदमा दर्ज करवाया गया. इसमें आरोप था कि जब 6 तारीख को हिंसा हुई थी तो पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार करने के बाद शांति कायम कर दी थी. हिंसा में परेश की बाइक टूट गई थी. जब वो उसे लेने के लिए गया तो उसकी हत्या कर दी गई. परेश की हत्या में पांच लोगों इम्तियाज, आजाद, आमिर, सलीम और आसिफ के खिलाफ 8 दिसंबर को हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज करवाया गया. हालांकि इनमें से तीन लोगों को 6 दिसंबर के लिए हुए दंगे में ही गिरफ्तार कर लिया गया था. बाकी दो लोगों को पुलिस अब भी गिरफ्तार नहीं कर पाई है. बीजेपी नेताओं का दावा है कि इस हत्या में बाहरी लोग शामिल हैं. परेश की हत्या को बीजेपी नेता आईएसआईएस की तर्ज पर की गई हत्या बता रहे हैं. वही   परेश के घर की कॉलोनी में एक पोस्टर लगाया गया जिसमे  परेश को  रातोंरात हिंदू शहीद बन बना दिया गया. साथ एक विशाल भंडार लगाया गया है. हालांकि उनके पिता ने इनकार कर दिया है कि उनके बेटे का कोई राजनीतिक जुड़ाव था.

हालांकि कर्नाटक कोमू सौहाद्र वेदिके नेताओं ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है कि जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं आई थी, तो इसे हत्या कैसे कहा जा सकता है. अगले साल राज्य में चुनाव हैं, बीजेपी के पास बताने के लिए कुछ नहीं है, ऐसे में वो हर घटना को सांप्रदायिक रंग देकर इसका फायदा उठाना चाहते हैं. उनका दावा है कि पिछले दिनों जब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कर्नाटक के दौरे पर थे तो उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से एग्रेसिव तरीके से काम करने को कहा था. खुद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ट्वीट कर ऐसे आरोप लगाए हैं.

 

लल्लनटॉप न्यूज और द क्विंट से धन्यवाद सहित साभार 

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