ट्रिपल तलाक के गवाह बनने वाले मौलवियों पर भी बने कानून- भाजपा सांसद

ट्रिपल तलाक के गवाह बनने वाले मौलवियों पर भी बने कानून- भाजपा सांसद
तीन तलाक को प्रतिबंधित करने और विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकार सुरक्षित करने से संबंधित ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2017 को सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में पेश कर दिया। विधेयक पर सदन में आज ही चर्चा भी हुई ।
बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने बिल का समर्थन किया और मौलवियों के खिलाफ भी कानून बनाने की मांग की. उन्‍होंने बहस में हिस्‍सा लेते हुए कहा, ‘क्यों बनाते हैं हम ऐसे रिश्ते जो पल दो पल में टूट जाते हैं,वादा तो करते हैं ताउम्र साथ निभाने का, लेकिन बीच में ही छोड़ जाते हैं.’

मीनाक्षी लेखी ने बिल के मुद्दे पर कांग्रेस पर हमला बोला. उन्‍होंने कहा कि मुझे कांग्रेस पर भरोसा नहीं है, लेकिन देश के कोर्ट पर मुझे पूरा भरोसा है. मुझे उम्मीद है कि कानून मंत्री जी कि राज्य सरकारों की सहमति होगी. लेकिन अगर किसी राज्य को इस कानून से दिक्कत है तो वो सरकार को लिखित में दें. मैं देश की सभी बहनों से कहना चाहूंगी कि जब आपका भाई नरेंद्र भाई मोदी जैसा हो तो उन्हे चिंता करने की जरूरत नही है. मीनाक्षी लेखी ने आगे कहा कि कांग्रेस और वो लोग जिन्होने इस बिल के इंट्रोडक्शन पर इस बिल के खिलाफ बोला वो सभी लोग पर्सनल लॉ बोर्ड की भाषा बोल रहे हैं.

लेखी ने कहा कि 1937 में बना एप्लीकेशन ऑफ शरिया लॉ….एप्लीकेशन है कानून नहीं है. कहीं नहीं लिखा है कि तलाक-ए-बिद्दत क्या है…या तलाक कैसे दिया जाए…जिसका जैसे मन हो तलाक दे. यही चीज सरकार इस कानून में लेकर आई है. तलाक-ए-बिद्दत एक कुप्रथा है. मौलवियों के खिलाफ भी कानून बनना चाहिए जो ट्रिपल तलाक के गवाह बनते हैं.

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